उसका मेकअप हो रहा था धुआं ....

सोचा था उसका कत्ल कर देंगे ...

पर ख़ुद का ही कत्ल करवा बैठे ...

जब उसे सजा देने की बारी आई तो ...

... ख़ुद पर इल्जाम लगा बैठे ?

हम रुखसत हुए उनकी यादें लेकर ...

वे मस्त हुए मेरी कब्र पर आकर ...

ऊपर से आँखों में अश्क थे,

अन्दर से चमक, मेरे रुखसत होने की

मेरा दिल फिर भी तड़प रहा था ....

उसका दिल मार रहा था हिलोरे ...

कब्र की मिटटी मेरे दिल की आंसू से हो रही थी गीली ...

उसके बनावटी आंसू से, चेहरा नही ...

उसका मेकअप हो रहा था धुआं ....

बहुत उदास हैं ....तिनके

हम बहुत उदास हैं ....
सोचता हूँ उस तिनके का क्या होगा ....
जो हवा के झोंके से कभी तनता है, तो कभी गिरता है..
फ़िर भी पड़ा रहता है मौन...
ना रोता है, ना हँसता है ....
बस उस एक झोंके का इन्तजार करता है ...
जो उस को पहुंचाए कहीं और ......

पापी पेट का सवाल है ....

पापी पेट के लिए... नौकरी.....
आप के लिए जीने की चाहत...
नहीं तो हम इस फिजां में....
कहाँ मुर्दे से कम हैं.....
अलविदा कहने को दिल बहुत करता है....
लेकिन जिन्दा रहने के लिए हूक-पीर है
क्या करूँ ..... मुझे किसी का बेसब्री से इन्तजार है ...
उस पतझड़, उस बहार की, जो लौट कर नही आई .....

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