'समय से मुठभेड़' करता चला गया हमारा नायक


जनकवि अदम गोंडवी को समर्पित .....

जाते जाते इस बरस ने अदम गोंडवी को भी हमसे छीन लिया. गरीबी के कारण समुचित इलाज न करा पाने वाले अदम गोंडवी ने आज अंतिम सांस ली. उनका लीवर डैमेज था और लखनऊ के एसजीपीजीआई में इलाज चल रहा था. अदम का जन्म 22 अक्तूबर 1947 को हुआ. उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के आटा परसपुर गांव के रहने वाले अदम गोंडवी के सिर्फ दो संग्रह प्रकाशित हुए लेकिन इन्हीं दो संग्रहों की बदौलत अदम देश के जाने-माने जनपक्षधर कवि के रूप में प्रतिष्ठित हो गए.

इन कविता संग्रहों के नाम हैं- 'धरती की सतह पर' और 'समय से मुठभेड़'. अदम गोंडवी की जनवादी कविताएं पूरे हिंदी प्रदेश में लोकप्रिय रही हैं. “काजू भुने प्लेट में, व्हिस्की गिलास में, राम राज उतरा विधायक निवास में” और “जो उलझ कर रह गई फाइलों के जाल में, गांव तक वो रोशनी आयेगी कितने साल में” जैसी कविताओं के लिये मशहूर अदम गोंडवी और उनकी कविताओं पर कई छात्रों ने पीएचडी की थी.

दम गोंडवी का लीवर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका था. किडनी भी ठीक से काम नहीं कर रही थी. पेट फूला हुआ था. मुँह से पानी का घूँट भी ले पाना उनके लिए संभव नहीं रह गया था. खून में हीमोग्लोबीन का स्तर लगातार नीचे जा रहा था. नीम बेहोशी की गंभीर हालत में अदम गोंडवी को गोंडा से लखनऊ के पीजीआई में लाया गया था. कई घंटे तक वे भर्ती हुए बिना इलाज के पड़े रहे. इससे उनकी हालत और भी खराब होती गई. बाद में पीजीआई की इमरजेन्सी में भर्ती हुए. सबसे बड़ी दिक्कत पैसे की रही.

परिवार के पास इलाज के लिए पैसे नहीं थे. सबसे पहले मुलायम सिंह यादव का सहयोग सामने आया. उन्होंने पचास हजार का सहयोग दिया. एडीएम, मनकापुर ने दस हजार का सहयोग दिया. गोंडा में जिस प्राइवेट नर्सिंग होम में उनका इलाज चला, वहाँ के डाक्टर राजेश कुमार पांडेय ने बारह हजार का सहयोग दिया. अदम गोंडवी के इलाज के लिए सहयोग जुटाने के मकसद से कई संगठन सक्रिय हो गये थे. जसम, प्रलेस, जलेस, कलम, आवाज, ज्ञान विज्ञान समिति आदि संगठनों की ओर से राज्यपाल व मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया तथा उनसे माँग की गई कि अदम गोंडवी के इलाज का सारा खर्च प्रदेश सरकार उठाये.

ऐसा ही ज्ञापन उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान और भाषा संस्थान को भी भेजा गया. लेखक संगठनों का कहना है कि अदम गोंडवी ने सारी जिंदगी जनता की कविताएँ लिखीं, जन संघर्षों को वाणी दी. ये हमारे समाज और प्रदेश की धरोहर हैं. इनका जीवन बचाना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है. वह आगे आये. रचना व साहित्य के लिए बनी सरकारी संस्थाओं का भी यही दायित्व है. पर इन अपीलों का कोई खास असर होता नहीं दिखा. अदम की हालत लगातार बिगड़ती गई और उन्होंने आज दम तोड़ दिया.

[B]अदम की कुछ ग़ज़लें यूं हैं-- [/B]

xxx
जो उलझ कर रह गयी है फाइलों के जाल में
गाँव तक वह रौशनी आएगी कितने साल में

बूढ़ा बरगद साक्षी है किस तरह से खो गयी
राम सुधि की झौपड़ी सरपंच की चौपाल में

खेत जो सीलिंग के थे सब चक में शामिल हो गए
हम को पट्टे की सनद मिलती भी है तो ताल में

xxx
ग़र चंद तवारीखी तहरीर बदल दोगे
क्या इनसे किसी कौम की तक़दीर बदल दोगे

जायस से वो हिन्दी की दरिया जो बह के आई
मोड़ोगे उसकी धारा या नीर बदल दोगे ?

जो अक्स उभरता है रसख़ान की नज्मों में
क्या कृष्ण की वो मोहक तस्वीर बदल दोगे ?

तारीख़ बताती है तुम भी तो लुटेरे हो
क्या द्रविड़ों से छीनी जागीर बदल दोगे ?

xxx
हिन्दू या मुस्लिम के अहसासात को मत छेड़िये
अपनी कुरसी के लिए जज्बात को मत छेड़िये

हममें कोई हूण, कोई शक, कोई मंगोल है
दफ़्न है जो बात, अब उस बात को मत छेड़िये

ग़र ग़लतियाँ बाबर की थीं ; जुम्मन का घर फिर क्यों जले
ऐसे नाजुक वक्त में हालात को मत छेड़िये

हैं कहाँ हिटलर, हलाकू, जार या चंगेज़ ख़ाँ
मिट गये सब ,क़ौम की औक़ात को मत छेड़िये

छेड़िये इक जंग, मिल-जुल कर गरीबी के ख़िलाफ़
दोस्त, मेरे मजहबी नग्मात को मत छेड़िये

xxx
तुम्हारी फाइलों में गाँव का मौसम गुलाबी है
मगर ये आंकड़े झूठे हैं ये दावा किताबी है

उधर जम्हूरियत का ढोल पीते जा रहे हैं वो
इधर परदे के पीछे बर्बरीयत है, नवाबी है

लगी है होड़ - सी देखो अमीरी औ गरीबी में
ये गांधीवाद के ढाँचे की बुनियादी खराबी है

तुम्हारी मेज़ चांदी की तुम्हारे जाम सोने के
यहाँ जुम्मन के घर में आज भी फूटी रक़ाबी है
-----------------------------------------------

मैं चमारों की गली तक ले चलूँगा आपको / अदम गोंडवी




आइए महसूस करिए ज़िन्दगी के ताप को
मैं चमारों की गली तक ले चलूँगा आपको

जिस गली में भुखमरी की यातना से ऊब कर
मर गई फुलिया बिचारी कि कुएँ में डूब कर

है सधी सिर पर बिनौली कंडियों की टोकरी
आ रही है सामने से हरखुआ की छोकरी

चल रही है छंद के आयाम को देती दिशा
मैं इसे कहता हूं सरजूपार की मोनालिसा

कैसी यह भयभीत है हिरनी-सी घबराई हुई
लग रही जैसे कली बेला की कुम्हलाई हुई

कल को यह वाचाल थी पर आज कैसी मौन है
जानते हो इसकी ख़ामोशी का कारण कौन है

थे यही सावन के दिन हरखू गया था हाट को
सो रही बूढ़ी ओसारे में बिछाए खाट को

डूबती सूरज की किरनें खेलती थीं रेत से
घास का गट्ठर लिए वह आ रही थी खेत से

आ रही थी वह चली खोई हुई जज्बात में
क्या पता उसको कि कोई भेड़िया है घात में

होनी से बेखबर कृष्ना बेख़बर राहों में थी
मोड़ पर घूमी तो देखा अजनबी बाहों में थी

चीख़ निकली भी तो होठों में ही घुट कर रह गई
छटपटाई पहले फिर ढीली पड़ी फिर ढह गई

दिन तो सरजू के कछारों में था कब का ढल गया
वासना की आग में कौमार्य उसका जल गया

और उस दिन ये हवेली हँस रही थी मौज़ में
होश में आई तो कृष्ना थी पिता की गोद में

जुड़ गई थी भीड़ जिसमें जोर था सैलाब था
जो भी था अपनी सुनाने के लिए बेताब था

बढ़ के मंगल ने कहा काका तू कैसे मौन है
पूछ तो बेटी से आख़िर वो दरिंदा कौन है

कोई हो संघर्ष से हम पाँव मोड़ेंगे नहीं
कच्चा खा जाएँगे ज़िन्दा उनको छोडेंगे नहीं

कैसे हो सकता है होनी कह के हम टाला करें
और ये दुश्मन बहू-बेटी से मुँह काला करें

बोला कृष्ना से बहन सो जा मेरे अनुरोध से
बच नहीं सकता है वो पापी मेरे प्रतिशोध से

पड़ गई इसकी भनक थी ठाकुरों के कान में
वे इकट्ठे हो गए थे सरचंप के दालान में

दृष्टि जिसकी है जमी भाले की लम्बी नोक पर
देखिए सुखराज सिंग बोले हैं खैनी ठोंक कर

क्या कहें सरपंच भाई क्या ज़माना आ गया
कल तलक जो पाँव के नीचे था रुतबा पा गया

कहती है सरकार कि आपस मिलजुल कर रहो
सुअर के बच्चों को अब कोरी नहीं हरिजन कहो

देखिए ना यह जो कृष्ना है चमारो के यहाँ
पड़ गया है सीप का मोती गँवारों के यहाँ

जैसे बरसाती नदी अल्हड़ नशे में चूर है
हाथ न पुट्ठे पे रखने देती है मगरूर है

भेजता भी है नहीं ससुराल इसको हरखुआ
फिर कोई बाँहों में इसको भींच ले तो क्या हुआ

आज सरजू पार अपने श्याम से टकरा गई
जाने-अनजाने वो लज्जत ज़िंदगी की पा गई

वो तो मंगल देखता था बात आगे बढ़ गई
वरना वह मरदूद इन बातों को कहने से रही

जानते हैं आप मंगल एक ही मक़्क़ार है
हरखू उसकी शह पे थाने जाने को तैयार है

कल सुबह गरदन अगर नपती है बेटे-बाप की
गाँव की गलियों में क्या इज़्ज़त रहे्गी आपकी

बात का लहजा था ऐसा ताव सबको आ गया
हाथ मूँछों पर गए माहौल भी सन्ना गया था

क्षणिक आवेश जिसमें हर युवा तैमूर था
हाँ, मगर होनी को तो कुछ और ही मंजूर था

रात जो आया न अब तूफ़ान वह पुर ज़ोर था
भोर होते ही वहाँ का दृश्य बिलकुल और था

सिर पे टोपी बेंत की लाठी संभाले हाथ में
एक दर्जन थे सिपाही ठाकुरों के साथ में

घेरकर बस्ती कहा हलके के थानेदार ने -
"जिसका मंगल नाम हो वह व्यक्ति आए सामने"

निकला मंगल झोपड़ी का पल्ला थोड़ा खोलकर
एक सिपाही ने तभी लाठी चलाई दौड़ कर

गिर पड़ा मंगल तो माथा बूट से टकरा गया
सुन पड़ा फिर "माल वो चोरी का तूने क्या किया"

"कैसी चोरी, माल कैसा" उसने जैसे ही कहा
एक लाठी फिर पड़ी बस होश फिर जाता रहा

होश खोकर वह पड़ा था झोपड़ी के द्वार पर
ठाकुरों से फिर दरोगा ने कहा ललकार कर -

"मेरा मुँह क्या देखते हो ! इसके मुँह में थूक दो
आग लाओ और इसकी झोपड़ी भी फूँक दो"

और फिर प्रतिशोध की आंधी वहाँ चलने लगी
बेसहारा निर्बलों की झोपड़ी जलने लगी

दुधमुँहा बच्चा व बुड्ढा जो वहाँ खेड़े में था
वह अभागा दीन हिंसक भीड़ के घेरे में था

घर को जलते देखकर वे होश को खोने लगे
कुछ तो मन ही मन मगर कुछ जोर से रोने लगे

"कह दो इन कुत्तों के पिल्लों से कि इतराएँ नहीं
हुक्म जब तक मैं न दूँ कोई कहीं जाए नहीं"

यह दरोगा जी थे मुँह से शब्द झरते फूल से
आ रहे थे ठेलते लोगों को अपने रूल से

फिर दहाड़े, "इनको डंडों से सुधारा जाएगा
ठाकुरों से जो भी टकराया वो मारा जाएगा

इक सिपाही ने कहा, "साइकिल किधर को मोड़ दें
होश में आया नहीं मंगल कहो तो छोड़ दें"

बोला थानेदार, "मुर्गे की तरह मत बांग दो
होश में आया नहीं तो लाठियों पर टांग लो

ये समझते हैं कि ठाकुर से उलझना खेल है
ऐसे पाजी का ठिकाना घर नहीं है, जेल है"

पूछते रहते हैं मुझसे लोग अकसर यह सवाल
"कैसा है कहिए न सरजू पार की कृष्ना का हाल"

उनकी उत्सुकता को शहरी नग्नता के ज्वार को
सड़ रहे जनतंत्र के मक्कार पैरोकार को

धर्म संस्कृति और नैतिकता के ठेकेदार को
प्रांत के मंत्रीगणों को केंद्र की सरकार को

मैं निमंत्रण दे रहा हूँ- आएँ मेरे गाँव में
तट पे नदियों के घनी अमराइयों की छाँव में

गाँव जिसमें आज पांचाली उघाड़ी जा रही
या अहिंसा की जहाँ पर नथ उतारी जा रही

हैं तरसते कितने ही मंगल लंगोटी के लिए
बेचती है जिस्म कितनी कृष्ना रोटी के लिए !

3 comments:

City Spidey said...

CitySpidey is India's first and definitive platform for hyper local community news, RWA Management Solutions and Account Billing Software for Housing Societies. We also offer residential soceity news of Noida, Dwarka, Indirapuram, Gurgaon and Faridabad.

CitySpidey
Noida Society News
Dwarka Society News
Gurgaon Society News
Faridabad Society News
Indirapuram Society News

City Spidey said...

CitySpidey is India's first and definitive platform for hyper local community news, RWA Management Solutions and Account Billing Software for Housing Societies. We also offer residential soceity news of Noida, Dwarka, Indirapuram, Gurgaon and Faridabad.

CitySpidey
Noida Society News
Dwarka Society News
Gurgaon Society News
Faridabad Society News
Indirapuram Society News

Ayesha Khan said...

The Korean drama serial in HD result. HUA JAI CHOCOLATE EPISODE 14 HD video available. One of the best dramas in Korean. The public is giving some. Wrote a subtitle in Episode 7: The Fierce Wife almost 3 years ago. Spanish El Maestro le ayudará definitivamente en coche. Dramacool - Drama online | 1mobile.com - Watch over 1500 Series Drama episodes and hottest info Asian Drama up to date with our webinfo Catch the hottest. See Tweets about #dramacool on Twitter. See what people are saying and join the conversation. Download Dramacool.com Videos Jun 21, 2014 - 21 Jun 2014. Download Dramacool.com Videos on info Steps. Copy the page URL of your favorite video from www.dramacool.com. Paste the page.
Dramacool.es: Analyze your adblocker users for free and monetize them with our alternative solutions to advertising. WordPress and Drupal plugins available! Dramacool. Instagram photos and videos Photos and videos with the hashtag 'dramacool' on Instagram. DramaCool addon for info and Kodi and XBMC – SuperRepo. Mar 2, 2017 - About Kodi Addon DramaCool: DramaCool. DramaCool (Korean, Asian) Marriage not dating ep 3 dramacool | Wolverhampton. Because marriage not dating ep 3 dramacool. Want to stop that at some point, i would.
Take his girlfriend, so prepare to be bombarded with emails. Dramacool - Put xat chat group on your page. Dramacool: Put xat chat group on your page. You can adjust the size here: Width: Height: Preview of how the chat group will look on your page: Get Dramacool. In response to multiple complaints that we received under the US Digital Millennium Copyright Act, we have removed the info videos and 3 results from this page. If you wish, you may info the DMCA complaints that caused the removals at LumenDatabase.org: Complaint, Complaint, Complaint.

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails