भोपाल नहीं, देश की सबसे बड़ी त्रासदी है


देश की सबसे बड़ी भोपाल गैस त्रासदी का एक और कड़वा सच सामने आया है। भोपाल के तत्कालीन डीएम मोती लाल सिंह ने खुलासा किया है कि सूबे की सरकार ने गैस त्रासदी के मुख्य आरोपी एंडरस को बचाने का पूरा प्रयास किया था। श्री सिंह ने कहा कि 7 दिसंबर 1984 की सुबह एंडरसन भोपाल आया था लेकिन उसी शाम को राज्य सरकार के भारी दबाव के चलते उसे चार्टर्ड प्लेन से वापस दिल्ली भेज दिया गया। सरकारें जनता की नहीं बल्कि धनवानों की जेब में हैं। यह हमेशा से होता रहा है की सरकार पूंजीपतियों से चंदा लेकर आम मजलूमों को भूल जाती है।

मोती लाल सिंह ने कहा कि उस समय राज्य के मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह और राज्य के मुख्य सचिव ब्रम्ह स्वरूप थे, जिनके दिशा निर्देश पर एंडरसन को पकड़कर छोड़ दिया गया और सही सलामत दिल्ली भेजा गया। उन्होंने राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि 7 दिसंबर को एंडरसन को पकड़कर विमान से भोपाल लाया गया था लेकिन उस दिन सचिव ब्रम्ह स्वरूप ने अपने कमरे में हमें बुलाकर यह निर्देश दिया कि एंडरसन को सही सलामत वापस भेजना है, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। सचिव ने कहा कि एंडरसन को भोपाल एयरपोर्ट से ही वापस भेजना है, जिसके बाद एक चार्टर्ड विमान की व्यवस्था करके उसे दिल्ली भेज दिया गया।

उन्होंने कहा कि एंडरसन प्रभावित क्षेत्र को देखना चाहते थे और पीड़ितों से मिलने के लिए वे काफी परेशान थे। वे बार-बार हमसे पूछ रहे थे कि यह हादसा कैसे हो गया। हमने उन्हें सारी बातें विस्तार से बताईं और कहा कि अब आप जल्द से जल्द भोपाल छोड़ दें और दोबारा यहां आने की कोशिश न कीजिएगा।

भोपाल गैस त्रासदी : दफन हुआ इंसाफ


25 साल पहले जिस भोपाल गैस कांड में हजारों लोग मारे गए थे और अनेकों लोग स्थायी रूप से विकलांग हो गए थे, उसके जिम्मेदार लोगों को सिर्फ दो साल की सजा और प्रत्येक पर एक लाख एक हजार 750 रुपए का जुर्माना लगाया गया है। सजा सुनाए जाने के कुछ मिनट बाद ही 25 हजार रुपए के मुचलके पर सात दोषियों को जमानत भी मिल गई। ऊपरी अदालत में अपील करने के लिए इनके पास 30 दिन का समय है।

और अब अदालत ने निकाले आंसू

भोपाल गैस पीड़ितों को इंसाफ दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे स्वयंसेवी संगठनों ने इसे बहुत देर से दी गई बहुत हल्की सजाया बताया और आरोप लगाया कि अभियोजन और सीबीआई ने इस मामले में पीड़ितों का पक्ष प्रभावी ढंग से नहीं रखा। भोपाल जिला अदालत ने सोमवार दोपहर गैस कांड के आरोपी केशव महेंद्रा सहित सात आरोपियों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।

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न्‍यायिक व्‍यवस्‍था के लिए खतरे की घंटी!

अदालत ने यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड पर भी पांच लाख रुपए का जुर्माना किया है। फैसला सुनाए जाते वक्त महेंद्रा सहित पांच आरोपी अदालत में उपस्थित थे। सीजेएम मोहन पी तिवारी द्वारा अंग्रेजी में दिए गए 93 पृष्ठीय फैसले में फरार आरोपी यूनियन कार्बाइड कापरेरेशन के तत्कालीन चेयरमेन वारेन एंडरसन और गैरहाजिर चल रहीं दो कंपनियों कार्बाइड कापरेरेशन, कार्बाइड ईस्टर्न इंडिया (हांगकांग) का उल्लेख नहीं है। इस मामले में सीबीआई की ओर से सी. सहाय ने पैरवी की। इस मामले का एक आरोपी शकील अहमद कुरैशी फैसले के वक्त कोर्ट में मौजूद नहीं था। उनके वकील ने अदालत को बताया कि वह इंदौर में गंभीर रूप से बीमार है। उसे एंबुलेंस से भोपाल लाया जा रहा है। अदालत ने इस बात को मानकर शकील की अनुपस्थिति में ही फैसला सुना दिया, जबकि शाम 6 बजे तक शकील अदालत में पेश नहीं हुआ था।

छावनी में तब्दील रही अदालत:

एहतियात के तौर पर पुलिस ने जिला अदालत को छावनी में तब्दील कर रखा था। इससे यहां पेशी पर आए अन्य लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। सीजेएम कोर्ट में भी जिन लोगों की पेशी थी, उन्हें अदालत के अंदर जाने नहीं दिया गया। कोर्ट का मुख्य प्रवेश द्वार सुबह दस बजे ही बंद करा दिया था। गेट नंबर एक के बाहर एक वज्र वाहन तैनात रहा।

गैस पीड़ित संगठन की प्रतिक्रिया:

भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन के संयोजक अब्दुल जब्बार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में मुआवजा लेते समय जो समझौता हुआ था, उसमें मृतकों की संख्या तीन हजार से अधिक थी, यदि प्रत्येक व्यक्ति की मौत के लिए पांच हजार रुपए का जुर्माना किया जाता तो वह भी करोड़ों रुपए होता। उन्होंने कहा हैरत की बात है कि फैक्टरी के मालिक केशव महेंद्रा और फैक्ट्री के जो कर्मचारी आरोपी थे, उन सभी पर एक ही राशि का जुर्माना किया गया।

कितनी सजा

भादवि की धारा 304-ए : केशव महेंद्रा, विजय गोखले, किशोर कामदार, जे मुकुंद, एसपी चौधरी, केवी शेट्टी, एसआई कुरैशी को दो साल की जेल और एक लाख रुपए जुर्माना। इसी धारा में यूका पर पांच लाख रुपए का जुर्माना।

१. धारा 338 में केशव महेंद्र सहित सातों आरोपियों को एक साल की जेल और एक हजार का जुर्माना।

२. धारा 337 में केशव महेंद्रा सहित सातों आरोपियों को छह महीने की जेल और पांच सौ का जुर्माना।

३. धारा 336 में केशव महेंद्रा सहित सातों को तीन माह की जेल और प्रत्येक पर 250 रु. का जुर्माना।

इंतजार ही रहा न्याय

फैसला सुनने बड़ी संख्या में गैस पीड़ित महिलाएं और संगठनों के लोग पहुंचे थे, लेकिन पुलिस ने किसी को भी अदालत भवन में नहीं जाने दिया। विरोध पर पुलिस ने उनसे मारपीट की। गैस पीड़ितों का कहना था कि 25 साल से अपने हक की लड़ाई लड़ते-लड़ते लाठियां खाई। आज फैसले के दिन भी इसका शिकार होना पड़ा।



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साभार -दैनिक भास्कर

तेरा चेहरा...


हथेलियों पर देखा था जिसका चेहरा ..
रेखाएं मिलती, सिकुड़ती, फैलती ...
फिर तन सा जाता उसका चेहरा ...
यह चेहरा ही तो है जिसे रोज हथेलियों में ....
पढ़ा करते हैं .....

बारिश की बूंदों में हम भी करते थे मस्ती

इ
बारिश की बूंदों से वर्षा रानी की याद आई.
जब हमें उसकी बूंदों से मिलती थी राहत.
उसकी हर बूंद से करते थे प्यार इतना,
की हर बूंद को हथेलियों से जकड कर ...
बाहों में भरते, दुलराते, छेड़ते ....
और फिर हथेलियों को गाल पर लगाते ....

हम भी कभी इश्क किया करते थे


जब उसकी धुन में जिया करते करते थे,
हम भी चुपचाप पिया करते थे,
आँखों में प्यास हुआ करती थी,
दिल में तूफान उठा करते थे,
लोग आते थे हमसे गजल सुनने,
हम उनकी बातें किया करते थे,
सच समझते थे उनके वादों को,
दिन रात उसकी यादो में जिया करते थे,
सपनो में उससे मिलकर,
दिल में फूल खिला करते थे,
घर की दीवार सजाने की खातिर,
हम उसका नाम लिखा करते थे,
आज उन्हें देखकर फिर याद आया,
हम भी कभी इश्क किया करते थे.
हम भी कभी इश्क किया करते थे.

पंजाब लश्कर और खालिस्तानी गुटों के निशाने पर


आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और खालिस्तान समर्थक गुट पंजाब में आतंकवादी हमलों की साजिश रच रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने इस संबंध में चेतावनी जारी की है।

पंजाब पुलिस के सूत्रों ने खुफिया जानकारियों के हवाले से बताया कि पाकिस्तान, कनाडा और अन्य देशों में सक्रिय खालिस्तान समर्थक गुट लश्कर के संपर्क में आ चुके हैं। खुफिया एजेंसियों के दस्तावेजों से पता चलता है कि 'खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स' (केजेडएफ) पंजाब में आतंकवादी हमलों को अंजाम देने के लिए लश्कर के संपर्क में आ चुका है।

केजेडएफ के सदस्य रणजीत सिंह नीता को लश्कर सहित अन्य आतंकवादी संगठनों से समर्थन हासिल करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

उल्लेखनीय है कि गुरदासपुर जिले का भामियाल सेक्टर गत 15 दिनों में आतंकवादी वारदातों का गवाह रहा है। ऐसा पहली बार हुआ है जब पाकिस्तान और कश्मीर में सक्रिय आतंकवादी गुटों ने पंजाब को निशाना बनाया है।

गुरदासपुर जिले के नोराट जयमाल सिंह इलाके में 24 अप्रैल को पंजाब पुलिस ने दो पाकिस्तानी घुसपैठियों को मार गिराया था। दोनों पक्षों के बीच हुई गोलीबारी में दो पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे और एक घायल हो गया था। यह इलाका जम्मू एवं कश्मीर सीमा के बेहद करीब है। भामियाल सेक्टर में 19 अप्रैल को भी पाकिस्तान की ओर से रॉकेट दागे गए थे।

पंजाब में पाकिस्तान से लगी 553 किलोमीटर लंबी अंतर्राष्ट्रीय सीमा है। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के पंजाब सीमांत के पुलिस उप महानिरीक्षक जागिर सिंह ने आईएएनएस से कहा, "प्रभावित इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। गुरदासपुर सेक्टर में आतंकवादियों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है।"

खुफिया सूचनाओं के अनुसार आतंकवादियों के निशाने पर डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह, पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, उप-मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल हैं। इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के परिजन भी खालिस्तान समर्थक गुटों के निशाने पर हैं।

पंजाब में 31 अगस्त 1995 को खालिस्तान समर्थक मानव बम ने बेअंत सिंह की हत्या कर दी थी। पंजाब पुलिस के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जिन लोगों को निशाना बनाए जाने की सूचना मिली है, उनकी सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी
उल्लेखनीय है कि पंजाब में अलगाववादियों का हिंसक अभियान दस वर्षों तक चला था। अलगाववादियों की हिंसक कार्रवाई में 25,000 लोग मारे गए थे। इस हिंसक अभियान को वर्ष 1993 में कुचल दिया गया था।
साभार - दैनिक भास्कर व जोश १८

मेरी बेबो अब उसकी परी बन गई....


मेरी बेबो अब उसकी परी बन गई....
परी ही रहना उड़नपरी मत बनना ...
पंख संभालना, दरिन्दे बहुत है यहाँ ....

मेरी माँ


धूप हुई तो आंचल बन कर कोने-कोने छाई अम्मा,

सारे घर का शोर-शराबा, सूनापन तनहाई अम्मा।

दबंगई कायम है ...


हरियाणा और उत्तर प्रदेश में न केवल दलितों का शोषण हो रहा है, बल्कि दबंग सवर्णों द्वारा उनकी बहु- बेटियों पर फिकरे कसे जाते हैं। आपत्तिजनक टिप्पणी होती है। ताजा मिशाल हरियाणा के हिसार का है। जहाँ दलितों की बस्ती जलाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। तनाव बढ़ता जा रहा है। दलितों ने इस कांड में जान गंवाने वाले बाप-बेटी के अंतिम संस्कार से इनकार कर दिया है। उनकी मांग है कि पहले तमाम आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए। बुधवार को मिर्चपुर गांव में दबंग सवर्णों ने दलितों के करीब 30 घरों को फूंक दिया। तनाव के चलते तमाम दलित परिवार गांव छोड़कर भाग रहे हैं।

दलितों का कहना है कि सुबह दबंग परिवारों के कुछ लड़कों ने उधर से गुजरते हुए आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। दलितों ने इसका विरोध किया था और हल्की-फुल्की झड़प भी हो गई थी। बाद में दबंगों के ये लड़के बड़ी तादाद में वापस आए और दलित बस्ती पर हमला बोल दिया। दबंगों ने करीब 30 घरों को आग के हवाले कर दिया। 18 साल की एक विकलांग लड़की सुमन जलते हुए घर से निकल नहीं पाई। उसके 70 साल के पिता ताराचंद ने उसे बचाने की कोशिश की पर दोनों ही इस बुरी तरह झुलस गए कि जान नहीं बच सकी।

इस घटना के बाद दलित बेहद हताश और गुस्से में हैं। उन्होंने दबंगों के इरादों के बारे में समय रहते पुलिस को सूचना भी दे दी थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। जाहिर है, कानून के राज की बात उनके लिए बेमानी हो चुकी है। कई डरे हुए दलित परिवार गांव छोड़कर जा रहे हैं। लेकिन दलितों का कहना है कि असल बेगुनाहों को पुलिस बचा रही है। उन्होंने हिसार के जनरल अस्पताल में मौजूद सुमन और ताराचंद के शव लेने से इंकार कर दिया है।


दोस्ती मरते दम तक निभाएंगे.....


खुदा से क्या मांगू तेरे वास्ते
सदा खुशियों से भरे हों तेरे रास्ते
हंसी तेरे चेहरे पे रहे इस तरह
खुशबू फूल का साथ निभाती है जिस तरह
सुख इतना मिले की तू दुःख को तरसे
पैसा शोहरत इज्ज़त रात दिन बरसे
आसमा हों या ज़मीन हर तरफ तेरा नाम हों
महकती हुई सुबह और लहलहाती शाम हो
तेरी कोशिश को कामयाबी की आदत हो जाये
सारा जग थम जाये तू जब भी गए
कभी कोई परेशानी तुझे न सताए
रात के अँधेरे में भी तू सदा चमचमाए
दुआ ये मेरी कुबूल हो जाये
खुशियाँ तेरे दर से न जाये
इक छोटी सी अर्जी है मान लेना
हम भी तेरे दोस्त हैं ये जान लेना
खुशियों में चाहे हम याद आए न आए
पर जब भी ज़रूरत पड़े हमारा नाम लेना
इस जहाँ में होंगे तो ज़रूर आएंगे
दोस्ती मरते दम तक निभाएंगे.....
एक बिछड़े दोस्त के लिए...

गोंडा की राजनीति में पंडितों को मरना और दलितों का शोषण ही लिखा है ....


पहले उ.प्र. के मंत्री रहे घनश्याम शुक्ला की हत्या, फिर राजनीति से छोटे स्तर पर जुड़े पंडितों की हत्या और अब एक और पंडित की भरी सभा में गोली मारकर हत्या. यह आग सालों से जल रही है.... गोंडा में पंडित और ठाकुर आपस में एक दुसरे की हत्या कर या करवा कर राजनीति की सीढ़ी चढ़ने का खेल, खेल रही है .... खासकर गोंडा में पंडित बनाम ठाकुर लड़ रहे है, पिस रहे हैं दलित. इसमे नुक्सान पंडितों क हो रहा है ... दलितों का शोषण किया जा रहा है .... यह लड़ाई कब ख़तम होगी, कुछ कहा नहीं जा सकता. इसी लड़ाई के कारण गोंडा आज भी कई साल पीछे है, जबकि पडोसी जिले कहीं ज्यादा विकसित हो चुके हैं ...
खबर यह है की ......
यूपी के गोंडा में अंबेडकर जयंती समारोह के अवसर आयोजित हो रही एक रैली के दौरान बहुजन समाज पार्टी के नेता की हत्या कर दी गई है। नेता का नाम हनुमान शरण शुक्ला है। घटना के समय वह मंच पर मौजूद थे।
केन्द्र सरकार की खिलाफत में पूरे जिले से जुटे बसपाइयों को बलिया से आए मुख्य अतिथि एवं जोनल कोआर्डीनेटर छट्ठ राम सम्बोधित कर रहे थे। तभी मंच की दाहिनी ओर से एक युवक दबे पांव आया और एक किनारे बैठे पार्टी नेता और जिला पंचायत सदस्य मंजू देवी शुक्ला के पति हनुमानशरण शुक्ल के सिर में सटाकर बारह बोर के तमंचे से एक गोली उतार दी। हत्यारा मौके से फरार हो गया। उन्हें तुरंत जिला अस्पताल पहुँचाया गया जहाँ डॉक्टरों ने बसपा नेता को मृत घोषित कर दिया।

अंधेर नगरी, चौपट राजा ...कबड्डी ...कबड्डी ...कबड्डी ...


पंजाब में कबड्डी चल रही है या, नौटंकी .....
दम तोडती हाकी की नर्सरी के लिए सरकार के पास देने को धेला नहीं है, लेकिन कबड्डी के लिए सरकारी खजाना खोल दिया है ....लोगों को बिजली-पानी ढंग से नहीं मिल रहा है ...पंजाब सरकार को केंद्र सरकार को देने के लिए के शेयर नहीं है, जिससे कई केंद्रीय फंड लेप्स हो गया है ....
इसे आप मर्जी जो कहें, हम इसे अंधेर नगरी, चौपट राजा कहेंगे ...
पंजाब बिजली संकट से जूझने लगा है । लेकिन हुकमरान कबड्डी खेलने और देखने में व्यस्त हैं।
तो सारे बोलो...कबड्डी....कबड्डी....कबड्डी.....कबड्डी.....कबड्डी......कबड्डी....कबड्डी..........कबड्डी....कबड्डी..

गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा पर हंगामा क्यों है बरपा



पहली अप्रैल से देश भर में लागू हुए शिक्षा अधिकार कानून को लेकर दिल्ली के पब्लिक स्कूलों समेत कई बड़े शहरों में स्कूल खोल कर धनकुबेर बने लोगों ने घोर आपत्ति जताई है. स्कूल के जरिये धनपति बने शिक्षा माफिया टाइप के लोगों को सरकार का आदेश ख़राब लग रहा है . यह बड़ी हैरानीजनक बात है . सरकार को शिक्षा के साथ - साथ स्वस्थ्य अधिकार क़ानून भी बनाना चाहिए. सभी को शिक्षा-स्वस्थ्य मौलिक अधिकार होना चाहिए. स्वस्थ्य-शिक्षा के खर्चे आम लोगों के विकास में सबसे बड़ी बाधा है. सरकारी जमीन पर बिना कोई टैक्स दिए स्कूल चलने वाले परबन्धन की फीस हर साल बढ़ जाती है, लेकिन जब गरीब के बच्चों को २५ फीसदी मुफ्त में पढ़ाने का क़ानून पास किया जाता है तो मानने से इंकार कर दिया जाता है. भारत में बेहतर शिक्षा अमीरों के घर तक सिमित होकर रह गयी. क्या गरीब बच्चों को बेहतर शिक्षा नहीं मिलनेचाहिए?
इस क़ानून को लेकर सबसे ज्यादा दिल्ली में हो हल्ला मचा है .. आखिर क्यों?
दिल्ली स्टेट पब्लिक स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन को शिक्षा की दुकानदारी पर क़ानून बर्दास्त नहीं है. दोनों हाथों से पैसे बटोर रहे इन लोगों को क़ानून से डर सताने लगा है की कहीं इनकी दुकानदारी चौपट न हो जाये. इनकी सीनाजोरी देखो..कहते हैं की शिक्षा अधिकार कानून को वह अपने स्कूल में लागू नहीं करेंगे। तर्क यह है की इस कानून में दिए गए प्रावधान हमारी शिक्षा के स्तर को दोयम दर्जे का बनाएंगे. जनाब शिक्षा स्तर ठीक रहेगा, दिक्कत इनकी जेब पर है. एक अप्रैल से केंद्र सरकार द्वारा 6 से 14 साल के हर बच्चे को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देने के लिए बनाया गया ऐतिहासिक शिक्षा का अधिकार कानून लागू कर दिया है. बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार एक्ट-2009 की वजह से यह संभव हुआ है।
मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिबल ने कड़े शब्दों में कहा है कि सभी निजी और अल्पसंख्यक स्कूलों को अपने यहां 25 फीसदी सीट गरीब बच्चों के लिए आरक्षित करनी होगी। जो भी इसका उल्लंघन करेगा, उसे दंडित किया जाएगा। एक अंग्रेजी न्यूज चैनल को दिए साक्षात्कार में सिबल ने कहा कि वर्ष 2011 से सभी स्कूलों को क्लास एक से 25 फीसदी सीट गरीब बच्चों के लिए आरक्षित करनी पड़ेगी। इसके विरोध में जाने वालों को दंड के लिए तैयार रहना होगा, क्योंकि यह अब कानून है।

देश का संबोधित किया प्रधानमंत्री ने
इस कानून के लागू होने के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राष्ट्र के नाम संदेश देते हुए शिक्षा के अधिकार और उसकी महत्ता को उजागर किया है। ये पहला मौका था जब आजाद भारत में प्रधानमंत्री ने किसी कानून को लेकर देश को संबोधित किया।
मनमोहन सिंह ने राष्ट्र के नाम अपने संदेश में कहा है कि शिक्षा के अधिकार के लिए पारित कानून बच्चों के लिए समर्पित है। बच्चों को शिक्षा दी जाना न सिर्फ राज्य सरकार बल्कि परिवार की भी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि बच्चों को ऐसे मूल्य दिए जाने चाहिए जो उन्हें एक जिम्मेदार और सक्रिय नागरिक बनाए। ताकि वे भारत के विकास में सहयोगी बनें।
संदेश में पीएम मनमोहन सिंह ने राज्य सरकारों से इसमें सहयोग की मांग की है। पीएम का यह राष्ट्र के नाम संदेश दूरदर्शन पर प्रसारित किया गया। उन्होंने कहा कि पैसे की कमी से इसमें कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। माना जा रहा है कि खुद मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने प्रधानमंत्री से देश को संबोधित करने का आग्रह किया था।

क्या है इस कानून की खासियत
- इस कानून की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब सरकार के लिए उन बच्चों को शिक्षित करना जरूरी हो जाएगा जो 6-14 के आयु वर्ग में आते हैं।
- यह कानून स्कूलों में शिक्षक और छात्रों के अनुपात को सुधारने की बात करता है। मसलन अभी कई स्कूलों में सौ-सौ बच्चों पर एक ही शिक्षक हैं। लेकिन इस कानून में प्रावधन है कि एक शिक्षक पर 40 से अधिक छात्र नहीं होंगे। हालांकि यह कोठारी आयोग की अनुशंसा 1:30 से कम है।
- इस कानून के अनुसार राज्य सरकारों को बच्चों की आवश्यकता का ध्यान रखते हुए लाइब्रेरी, क्लासरुम, खेल का मैदान और अन्य जरूरी चीज उपलब्ध कराना होगा।
- 15 लाख नए शिक्षकों की भर्ती, जिसे एक अक्टूबर तक ट्रेन करना जरूरी है।
- स्कूल में प्रवेश के लिए मैनेजमेंट बर्थ सर्टिफिकेट फिर ट्रासंफर सर्टिफिकेट आधार पर प्रवेश से मना नहीं कर सकता।
- सत्र के दौरान कभी भी प्रवेश।
- निजी स्कूल में 25 फीसदी सीट गरीब बच्चों के लिए।

क्या हैं इस कानून की खामियां
- इस कानून की सबसे बड़ी खामी यह है कि इसमें 0-6 आयुवर्ग और 14-18 के आयुवर्ग के बीच के बच्चों की बात नहीं कई गई है। जबकि संविधान के अनुछेच्द 45 में साफ शब्दों में कहा गया है कि संविधान के लागू होने के दस साल के अंदर सरकार 0-14 वर्ग के आयुवर्ग के बच्चों को अनिवार्य और मुफ्त शिक्षा देगी। हालांकि यह आज तक नहीं हो पाया।
- अंतराष्ट्रीय बाल अधिकार समझौते के अनुसार 18 साल तक की उम्र तक के बच्चों को बच्चा माना गया है। जिसे 142 देशों ने स्वीकार किया है। भारत भी उनमें से एक है। ऐसे में 14-18 आयुवर्ग के बच्चों को शिक्षा की बात इस कानून में नहीं कई गई है।
- इस कानून को केंद्र सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि में से एक बताया जा रहा है। जबकि संविधान में पहले से ही यह प्रावधान है और 2002 में हुए 86वें संशोधन में भी शिक्षा के अधिकार की बात कई गई थी। लेकिन सरकार अब जाकर यह कानून ला रही है। इन आठ सालों में बच्चों की पूरी एक पीढ़ी इस अधिकार से बाहर हो गई।

इतिहास
संविधान के अनुछेच्द 45 में 0-14 उम्र के बच्चों को शिक्षा देने की बात कही गई।
2002 में 86 वें संशोधन में शिक्षा के अधिकार की बात कही गई।
2009 में शिक्षा का अधिकार बिल पास हो सका, एक अप्रैल 2010 में इसे पूरे देश में लागू कर दिया जाएगा।

पंज-आब के पानी में यूरेनियम

पांच नदियों का द्वाब पंजाब, अब बे-आब हो रहा है। आर्सेनिक के बाद पंजाब के एक बड़े इलाके के भूजल और सतही जल में यूरेनियम पाया गया है। दक्षिण पश्चिम पंजाब क्षेत्र में “सेरेब्रल पाल्सी” से पीड़ित बच्चों के बालों में यूरेनियम के अंश पाये गए है। हाल ही में जर्मनी की एक लैब ने फरीदकोट के एक मंदबुद्धि संस्थान “बाबा फ़रीद केन्द्र” के बच्चों के बालों पर शोध के बाद रिपोर्ट दी है। जर्मनी की माइक्रो ट्रेस मिनेरल लैब की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि शोध किये गए लगभग 150 बच्चों के बालों में 82 से लेकर 87 प्रतिशत तक यूरेनियम पाया गया है। इस खुलासे के बाद गुरुनानक देव विश्वविद्यालय द्वारा एक विशेष वैज्ञानिक जाँच शुरु करने का फ़ैसला किया गया है।

डॉ अम्बेडकर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, जालन्धर के फ़िजिक्स विभाग में कार्यरत असिस्टेंट प्रोफ़ेसर डॉ रोहित मेहरा ने 34 गाँवों के विभिन्न हैण्डपम्पों के पानी का परीक्षण किया। उनके अनुसार पानी में यूरेनियम की उपलब्धता के मामले में सबसे ज्यादा खतरनाक स्थिति मंसा जिले की है। अध्ययन के अनुसार मिट्टी के नमूनों में भी यूरेनियम, रेडियम, थोरियम और पोटेशियम की मात्रा का स्तर भी काफ़ी उँचा पाया गया है। मेहरा कहते हैं “ऐसा सम्भवतः भटिंडा इलाके की तोशाम पहाड़ियों से आ रही मिट्टी के कारण हो सकता है, लेकिन इस सम्बन्ध में निष्कर्ष निकालने लिये और शोध तथा अध्ययन करने पड़ेंगे…”

इस समस्या ने परमाणु ऊर्जा वैज्ञानिकों का ध्यान भी आकर्षित किया और उन्होंने इलाके के पानी और मिट्टी का परीक्षण किया तथा बच्चों के विभिन्न मेडिकल टेस्ट भी किये। गुरुनानक देव विश्वविद्यालय के वरिष्ठ जियोफ़िजिसिस्ट डॉ सुरिन्दर सिंह बताते हैं, पहले भी पंजाब के मालवा इलाके के भूजल और सतह जल दोनों में रासायनिक परीक्षण में यूरेनियम की मात्रा मानक से ज्यादा स्तर पर पाई गई थी, इसलिये बच्चों के बालों में यूरेनियम का पाया जाना खतरे की घण्टी तो है, लेकिन यह अनपेक्षित नहीं है। वे आगे कहते हैं, पूर्व में किये गये विभिन्न अध्ययनों के अनुसार भटिण्डा जिले में पीने के पानी में यूरेनियम की सान्द्रता 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर तक पाई जा चुकी है, जबकि वैज्ञानिकों के अनुसार पानी में यूरेनियम का मानक स्तर 9 माइक्रोग्राम प्रति लीटर से अधिक नहीं होना चाहिये।

पंजाब सरकार पंजाब के विभिन्न इलाकों में 200 रिवर्स ऑस्मोसिस (आरओ) संयंत्र लगाने की योजना बना रही थी। रिवर्स ओस्मोसिस एक प्राकृतिक लेकिन वैज्ञानिक प्रक्रिया होती है जिससे पानी में भारी धातुओं की उपस्थिति को कम किया जाता है। इस प्रक्रिया के द्वारा जल को प्रदूषण मुक्त करके उपयोग करने लायक बनाया जाता है। लेकिन अब पंजाब के मालवा इलाके, खासकर भटिंडा, फ़रीदकोट, मंसा, संगरूर, मुक्तसर और मोगा आदि यूरेनियम वाले इलाकों में यह योजना बेमानी हो गई है। अन्य हेवी मेटल्स (जैसे आर्सेनिक, क्रोमियम, लौह, आदि) की तरह यूरेनियम को आरओ से निष्क्रिय नहीं किया जा सकता। अब अन्य किसी वैकल्पिक योजना पर काम करना पड़ेगा।

अपंग होते बच्चे


फरीदकोट के छोटे से इलाके में बच्चों में शारीरिक विकृतियां देखी जा सकती हैं जैसे-बड़ा सिर, फूली हुई आंखें, मुड़े हाथ और मुड़े पैर। इन असमान्यताओं की जांच के लिए पिछले दिनों बच्चों के बालों के सैंपल साउथ अफ्रीकी टॉक्सिकॉलजिस्ट डॉ. करीन स्मिट की पहल पर जर्मन लैब में भेजे गए थे। पर हाल ही में मिली लैब रिपोर्टों से पता लगा है कि शारीरिक गड़बड़ी की वजह असल में यूरेनियम की उच्च मात्रा होना है।

फरीदकोट के बाबा फरीद सेंटर फॉर स्पेशल चिल्ड्रेन के हेड पृथपाल सिंह कहते हैं, 'टेस्ट नतीजों से हम हैरान हैं क्योंकि पंजाब में यूरेनियम का कोई ज्ञात स्त्रोत नहीं है। यूरेनियम की बात उजागर होने पर अब जर्मन और साउथ अफ्रीकी डॉक्टरों की मदद से 150 अन्य प्रभावित बच्चों पर टेस्ट किए जा रहे हैं। इस बात की पड़ताल की जा रही है कि क्या यूरेनियम कहीं से रिसाव के कारण आया है या इसका स्त्रोत प्राकृतिक है।'

टेस्ट के सिलसिले में अपनी सहयोगी डॉ. वेरिर ड्रिर के साथ यहां आए जोहानिसबर्ग से टॉक्सिकॉलजिस्ट डॉ. स्मिट के मुताबिक, 'जब मैंने पहली बार ब्रेन डैमिज के इतने बड़े पैमाने पर सबूत देखे तो मुझे लगा कि ऐसा जहर के कारण हो रहा है। यूरेनियम के बारे में तो मैंने कतई सोचा भी नहीं था। पर डॉ. स्मिट की कोशिशों से जर्मन लैब में सच सामने आ गया।

डॉ. स्मिथ ने कहा कि यूरेनियम के असर से बच्चों को मुक्त करने के लिए डीटॉक्सीफिकेशन किया जाना जरूरी है। यह तभी संभव है जब भारत और पंजाब सरकार के अलावा समाजसेवी संस्थाएं भी आगे आएं। यूरेनियम से मुक्ति दिलाने के लिए हर बच्चे पर 3 से 6 लाख रुपए खर्च आएगा।

उन्होंने कहा कि भारतीय मंदबुद्धि बच्चों के बालों में यूरेनियम के अंश मौजूद होने का तो पता चल गया है लेकिन इसका असर शरीर के दूसरे हिस्सों पर कितना है, इसका पता करना भी जरूरी है। जिसके लिए सभी बच्चों के टेस्ट एकत्र कर लिए हैं जो जर्मनी की ‘माइक्रो ट्रेस मिनरल लेबोरेट्री’ को भेजे जा रहे हैं ।
साभार - दैनिक भास्कर

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