बडे भाई निशीथ जोशी की कलम से


स्वर्गीय आपा और लाला भाई (मो माबूद ) के नाम जिनके बिना ये बेटा इतना बड़ा नहीं हो सकता था। आपकी बहुत यद् आती है। इंशा अल्लाह कभी तो मुलाकात होगी। वैसे तो आप हरदम मेरे साथ हो। कभी तहजीब के रूप में तो कभी दुआओं के ताबीज के रूप में। सिर्फ़ यही है मेरी जिंदगी की कमाई -------निशीथ
खौफ ------
रोक लो इन हवाओं को
मत आने दो शहर से
मेरे गांव की ओर
वरना मंगल मामा
हिंदू हो जाएगा
और रहमत चाचा
मुसलमान हो जाएगा
और रहमत चाचा मुसलमान.....

मालेगांव की ‍आग पहुंची उत्तर प्रदेश

मालेगांव बम धमाके की आग अब उत्तर प्रदेश में सुलगने लगी है । गोरखपुर एक बार फिर सुर्खियों में है । इस बार साध्वी प्रज्ञा को लेकर गोऱखपुर का नाम सामने आया है । गोरखपुर के विधायक पर साध्वी के तार जुड़े होने के आरोप है । गोरखपुर के सांसद और पूर्वी उत्तर प्रदेश के हिंदू नेता योगी आदित्य नाथ भी घेरे में है । यह वही योगी है,जिन पर यूपी की पुलिस ने एक बार हाथ डालने की कोशिश की थी, तब गोरखपुर समेत पूरे उत्तर प्रदेश में बवाल खड़ा हो गया था । गोरखपुर में आगजनी हुई दंगा हुआ । सब राजनीति से प्रेरित है ।

पहले खादी से तो अब भगवा से राजनीति

एक जमाना था जब खादी से देश की राजनीति संचालित होती थी, लेकिन समय बदल गया है । देश की राजनीति खादी नहीं भगवा से चल रही है । भगवा है ठीक है, लेकिन भगवा की आड़ में चंद राजनेता गंदी राजनीति कर रहे हैं । हो सकता है साध्वी भी इसी गंदी राजनीति का शिकार बनी हो, लेकिन जांच तो होनी ही चाहिए ।

बहुत कुछ छिपा है बीहड़ों में

मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की बीच पड़ते बीहड़ों में वह बहुत कुछ सच्चाई छिपी है, जो एटीएस को तलाश है । चंबल की घाटी में हर वह सुराग मिल सकता है, जो एटीएस को शायद उत्तर प्रदेश के तराई इलाके से नहीं मिल सकती है । मालेगांव ब्लास्ट के तार उत्तरप्रदेश से होते हुए जम्मू-कश्मीर तक पहुंच गए हैं। मुंबई एटीएस ने बुधवार को कानपुर से एक शख्स को हिरासत में लिया है। उस शख्स का नाम दयानंद पांडे बताया जाता है और एटीएस को उसके वीएचपी से जुड़े होने की आशंका है। दयानंद को लेकर एटीएस लखनऊ रवाना हो गई। लखनऊ लाकर उससे मालेगांव ब्लास्ट मामले में पूछताछ की गई।एटीएस ने सोमवार को मुंबई की अदालत में एक अर्जी दाखिल कर एक प्रमुख हिंदू नेता से पूछताछ करने की इजाजत मांगी है तथा इस संबंध में उत्तरप्रदेश सरकार से सहयोग दिलाने की बात कही है। एटीएस ने फरुखाबाद और पूर्वी उत्तरप्रदेश में गुपचुप अभियान चलाकर मालेगांव विस्फोटों के लिए ठोस सबूत जुटाए हैं।भाजपा उत्तरप्रदेश से पार्टी के सांसद आदित्यनाथ का खुलकर बचाव में उतर आई है । आदित्यनाथ ने मालेगांव विस्फोट में उनका हाथ होने के बारे लगाई जा रही अटकलबाजियों के बाद मंगलवार को एटीएस को उन्हें गिरफ्तार करने की चुनौती दी थी।


चुनौती छोड़ कर जांच में सहयोग करे नेता
अगर साध्वी सही है, योगी आदित्यनाथ सही है, दयानंद पांडेय ने कोई गलत काम नहीं किया है तो भाजपा और संघ एटीएस को चुनौती क्यों दे रही है ? सभी राजनीतिक दलों को एक होकर इसके लिए अपेन स्तर पर एक जांच कमेटी तैयार कर मामले की सही जांच करना चाहिए । पुलिस और कानून को चुनौती देकर आखिर हमारे राजनेता साबित क्या करना चाह रहे हैं । मामले को राजनीतिक तूल दिया जा रहा है, जो देश के घातक है ।

देह दर्शन या ड्रग्स को बढ़ावा


मधुर भंडारकर की फिल्म ‍'फैशन' में भारतीय फिल्म की नायिकाओं ने सभी पराकाष्ठा पार कर दी है । देह दर्शन के लावा धूम्रपान 'फैशन' का सबसे बड़ा नकारात्मक हिस्सा है । फिल्म की नायिका कंगना राणावत और प्रिंयका चोपड़ा जिस तरह खुलेआम सिगरेट के धुंए के छल्ले उडाती नजर आईं, तो उससे भी कहीं ज्यादा बोल्ड शराब पीने की सीन रही है । अधनंगे बदन के साथ सिगरेट और शराब की मस्ती वाली 'फैशन' समाज को क्या संदेश देना चाह रही है, यह फिल्म देखने वाले भी नहीं बता सके । 'डा‍न' फिल्म में हीरो शाहरुख खान ने सिगरेट के धुंए उड़ाने पर जब बवाल खड़ा हो सकता है, तो फैशन की दारू और सिगरेट सैंसर बोर्ड को क्यों नजर नहीं आए । फैशन में तो हद ही कर दी है, मिनट दर मिनट सिगरेट के कश हीरो और हीरोइन लगा रहे हैं, लेकिन किसी को परवाह नहीं है । फिल्म में कंगना राणावत को ड्रग्स लेते जैसे दिखाया है, क्या यह उचित है ? कंगना राणावत ही क्यों प्रिंयका चोपड़ा भी क्लब में ड्रग्स लेती हैं, उसके बाद अपना सबकुछ लुटा देती हैं (हालांकि चोपड़ा इससे पहले ही अपना सबकुछ लुटा चुका होती है)। फैशन में मुंबई की क्लबों को जिस तरह से दिखाया गया है, सही हो सकता है, लेकिन फिल्म में सिगरेट, शराब, स्मैक, नशीले इंजैक्शन लेते होरी और हीरोइन ने सभी मर्यादा लांघ कर लोगों को गलत संदेश दिया है ।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा सर्वजिनक स्थानों पर धूम्रपान पर पाबंदी लगाने के बाद उम्मीद जगी थी कि लोग सुधर जाएंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो सका । जब सिगरेट, शराब और अन्य तरह के नशीले ड्रग्स पर रोक है तो फैशन में इतनी मस्ती क्यों ? सैंसर बोर्ड सो कर फिल्में पास क्यों कर देता है । यही नहीं धूम्रपान पदार्थों के विज्ञापन पर भी रोक है, लेकिन फैशन में धूम्रपान पर रोक क्यों नहीं है ?

आखिर भगवा धारियों में उबाल क्यो ?


मालेगांव बम धमाके में साध्वी प्रज्ञा सिंह का नाम आने से 'भगवा' में आखिर उबाल क्यों हैं ? क्या सिर्फ़ मुसलमान ही आंतकी हो सकते हैं ? "भगवाधारी" का जब नाम आया तो सारे भगवाधारी नाराज हो गए । जब मुल्ला, मौलवी और मुसलमानों पर उंगली उठाई जा सकती है, तो हिंदू संगठनों में कुछ भगवाधारियों पर उंगली क्यों नहीं उठ सकती है । चलो कुछ देर के लिए मान लेते हैं कि साध्वी प्रज्ञा का धमाके से कोई संबंध नहीं है, तो डर किस बात की है । साध्वी उमा भारती बिल्कुल ठीक कर रही हैं, लेकिन यह कोई प्रज्ञा का चरित्र प्रमाण पत्र नहीं है, जिसे ठीक समझा जाए । देश से जुड़ी हुई गंभीर बात है, जिस पर सभी दलों को एक होकर काम करना चाहिए । ऐसा नहीं कि देश में कुछ मुसिलम संगठन ही आंतकी गतिविधियों में संलिप्त हैं, हिंदू संगठनों के कुछ मठाधीश भी इस दायरे में आ रहे हैं । हालांकि कभी छात्र नेता रहीं प्रज्ञा का चंबल के आस-पास इलाके में प्रवचन करना लोगों को पच नहीं रहा है । मान लेते हैं कि प्रज्ञा निर्दोष है, तो जांच से घबराना कैसे ? बवाल पर उबाल फैलाने के लिए न्यूज चैनलों ने काम शुरू कर दिया है । कोई मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज को जोड़ रहा है तो कोई वरिष्ठ अफसर से मोहब्बत की बात कर रहा है । छात्र राजनीति के बाद साध्वी बनी प्रज्ञा में क्या बदलाव आया , जिससे उनका नाम आतंकी गतिविधियों से जुड़ गया ? इस पूरे मसले पर भगवाधारी ही नहीं तमाम हिंदू संगठनों को एक होकर गंभीरता से सोचना होगा । पूरे मामले को इमानदारी के साथ जांच होनी चाहिए ।

कहां हो गांधी जी

मैं २ अक्तूबर को एक न्यूज चैनल देख रहा था,कि चैनल पर दिखाया गया कि स्वर्ग की सीढ़ी मिल गई है । आप स्वर्ग जाना चाहते हैं तो रिपोर्टर के साथ रहें । मैं भी पीछे-पीछे चल पड़ा । अभी स्वर्ग की तीन सीढ़िया चढ़ा ही थी कि दो कुत्ते मेरे पीछे लग गए । बोले मैं जाऊंगा, मैंने पूछा क्यों ? जवाब था कि कुत्ते के बिना इंसान स्वर्ग जा ही नहीं सकते । युधिष्ठर ने भी कुत्तों को सहारा लिया था । स्वर्ग के साथ नरक को भी रास्ता जा रहा था, मैंने सोचा नरक के प्राणियों का बाहर से ही दर्शन कर लिया जाए । झांक कर देखा तो मिजाज शुभान अल्लाह....दिल करा रुक जा... वहां सुर, सुरा और सुंदरी अलमस्त दिखे । मेरी निगाहें किसी को खोज रही थी, लेकिन नरक...छी-छी-छी ... सो मैंने स्वर्ग की तरफ पैर बढ़ा दिए । मेरे कुछ जानपहचान वाले मिले, कहा स्वर्ग में स्वागत है । मैंने पूछा गांधी जी नहीं दिख रहे हैं, जवाब मिला कहीं बैठे अहिंसा की बात कर रहे होंगे । मैं आगे बढ़ा, देखा गाँधी जी लाठी के सहारे स्वर्ग से अपने सपने के भारत को टुकुर-टुकुर निहार रहे थे ।
गांधी जी का मन बैचेन था, पांव छूकर मैं भी नीचे देखने लगा । गांधी जी पावर वाले चश्मे के पीछे से एक नजर मुझ पर डाला, कहा इतनी भी क्या जल्दी थी । मैंने कहा बापू जी मैं तो एक चैनल के सुझाए रास्ते से जीते- जी स्वर्ग पहुंचा । आप से मिलने की बड़ी चाह थी, सो पूरी हो गई । मुन्ना भाई में आप सीधे टपोरी संजय दत्त से बातें कर रहे थे । फिल्म देखी तो मुझको भी आपसे मिलने की इच्छा पैदा हो गई । कई रातें लाइब्रेरी में गुजारी, लेकिन आप नहीं आए । हां ख्यालों में रोज आते रहे । मोबाइल के रिंग टोन में ‍‍॥ऐनक पहने लाठी पकड़े चलते थे वो शान से, जालिम कांपे थर-थर-थर सुनकर उनका नाम रे, कद था उनका छोटा सा, सरपट उनकी चाल रे ....बंदे में था दम, वंदेमातरम.... सुनता रहता हूँ ।
गांधी जी बोले, पुत्तर मैं विचारों में हूं । तब तक न्यूज चैनल का reporter आया॥ भाई साहब अब धरती पर चलने का समय हो गया है । मैंने कहा थोड़ी देर और ठहरते हैं, बापू जी से बातें कर लें ।
मेरे मन में कई सवाल हैं, अगली बार जाकर मैं उस सवाल का जवाब गाँधी जी जरुर लूँगा ... शेष अभी है .....

हे प्रभु, बीवी दिलवा दो ...

एक भक्तगण गया हनुमान जी के मदिंर
रोते चिल्लाते उसने जब प्रवेश किया अंदर
बोला भक्त प्रभु से, हे मालिक मेरी भी नैया पार करो
इस बदनसीब अभागे पर अब तो कुछ उपकार करो
अब हमारी गली में नहीं रहा नहीं है कोई कुंवारा
मैं आया तेरी शरण में जो बच गया बेचारा
हे प्रभु, करवा दो मेरी भी एक बार शादी
फिर चाहे टेरीकाट की जगह पहनना पड़े मुझको खादी
बोले प्रभु, अजीब है इस दुनिया का यह चक्कर
अरे आया था तुझसे भी पहले अभी एक घनचक्कर
बोला था प्रभु, मेरी नैया पार करवा दो
मुझको या फिर मेरी बीवी को ही मरवा दो
सुना शादी से वह इतना तंग हो रहा
अरे फिर तू क्यूं शादी के लिए इतना रो रहा
हे प्रभु, मारो गोली उसको मेरा तो काम बना दो
और न सही तो, उसकी ही बीवी मुझको दिलवा दो
हे प्रभु, एक बार यह कर दो मेरी पूरी आस
शादी के इंतजार में चेहरे पर उग आई है घास
हाल जानकर उसका 'महाबीर' की आंखे भर आईं
रखकर सिर पर हाथ उन्होंने अपने दिल की बात बताई
सुन रे भक्त, मै तुझको सारी बात समझाता हूं
पहले अपनी करवा लूं, फिर तेरी करवाता हूं.......

तबरेज और मकसूद भी तो आजमगढ़ के हैं

मैं इस उम्मीद के साथ यह विचार भेज रहा हूं, जो अनायास नहीं उपजे हैं। एक दर्द था, एक पीड़ा थी, ऐसा लगा कहीं हम इंसानियत के साथ दगा तो नहीं कर रहें। आतंक का सिर्फ एक ही चेहरा होता है दहशत। वहीं इंसानियत का भी एक चेहरा है भाईचारा। मैनें इस दोनों को नजदीक से देखा है। बस मन उगलता गया और मैं लिखता गया। उम्मीद है आपके मंच पर मेरे इन विचारों को कहीं न कहीं जगह मिलेगी .....
आजमगढ़ के पिपरही गांव के पास सफारी और ट्रक में भिडंत़ शायद ही कभी भूल सकूंगा। 10 जुलाई 2008 की रात हुए इस हादसे में अमर उजाला के दो साथी मौके पर ही काल में समा गए, जबकि क्षतिग्रस्त सफारी के अंदर ही चार साथी जिंदगी और मौत से जूझ रहे थे। अंधेरी रात और तेज बारिश में सड़क पर गाड़ियां फर्राटे भर रही थे। इन चारों की चीख पुकार गाड़ियों के फर्राटे से कहीं अधिक थी, लेकिन किसी की मानवता नहीं जागी। इसी बीच गोरखपुर से आजमगढ़ जा रही एक मारुति वैन में सवार दो नव युवकों को इन चारों की आवाज सुनाई पड़ी। जिन्होंने किसी बात की परवाह किये हुए चारों को गाड़ी से बाहर निकाला और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। इसी बीच हमारे अन्य साथी भी घटनास्थल पर पहुंच चुके थे।
चारों घायल साथी को गोरखपुर लाया गया। डाक्टरों ने इलाज शुरू किया, सबकी दुआएं और ऊपर वाले की मेहरबानी थी कि जिसके बचने की उम्मीद किसी को नहीं थी, वे आज हमारे साथ खबरों के माया जाल में उलझ चुके हैं। उन दोनों युवकों की संवेदना को सभी ने सलाम किया। अगर वे नहीं रूकते तो हमको और नुकसान हो सकता था। घटना के कई दिनों बाद तक इन दोनों ने चारों साथियों का कुशलक्षेम पूछा। कभी ऐसा लगा ही नहीं कि ये अजनबी थे। जब इनका फोन आता लगता कोई अपना हो। अमर उजाला ही नहीं, पूरे गोरखपुर ने इन दोनों युवकों को आंखों पर बैठाया। गोरखपुर प्रेस क्लब ने इन दोनों नवयुवकों के जज्बात को सलाम करते हुए इनको सम्मानित करने का फैसला लिया। इस घटना को करीब दो महीने बीत चुके। हर कोई अपने काम में व्यस्त। तभी एकाएक खबर आती है देश में हो रही आंतकी गतिविधियों में आजमगढ़ के युवकों की ज्यादा सहभागिता है। कनाट प्लेस में बम विस्फोट के पीछे दिल्ली पुलिस मुतभेड़ में मारे गए 20 साल के मोहम्मद आतिफ उर्फ बशीर और 19 वर्षीय मोहम्मद साजिद का हाथ होना बता रही है। मोहम्मद सैफ, जियाऊ जैसे ना जाने कितने युवा आजमगढ़ के बताये जा रहे हैं। ये वही आजमगढ़ है जिसकी पहचान कभी राहुल सांकृत्यायन हुआ करते थे, यह वही शहर है जहां कैफी आजमी ने कौमी एकता की नींव रखीं थी। वहां अब भाई ही भाई को शक की निगाह से देख रहा है। इसी शहर में अल्लामा शिब्ली नोमानी ने पेश की इंसानियत की मिशाल। मौजूदा हालत यह है हर जगह आजमगढ़ की ही चरचा हो रही है। हिंदु हो तो ठीक लेकिन मुसलमान हो तो गड़बड़। लेकिन तबरेज और मकसूद को आज भी गोरखपुर के अधिकांश लोग भगवान का फरिश्ता मानते हैं। यह तबरेज और मकसूद वहीं है जिन्होंने चार पत्रकारों की जान बचाई। समय रहते इन दोनों ने अगर इन्हें सफारी से बाहर न निकाला होता शायद मैं यह लेख भी न लिखा पाता। बात केवल तबरेज और मकसूद की ही नहीं। परवेश, तौहीर, काशिफ, नसीम आदि जैसे कई नाम है जिन्होंने अलग अलग सड़क दुर्घटनाओं में कई हिंदु परिवारों की रक्षा की है। आखिर ये भी तो उसी आजमगढ़ के हैं, जहां इन दिनों तलाशे जा रहे हैं इंसानियत के दुश्मन। पुलिस की काली सूची में आए आजमगढ़ के संजरपुर, फरिहा, सरायमीर गांव के आम लोगों का कहना है कि कुछ लोगों ने गड़बड़ियां कीं, लेकिन यहां के बाशिंदे बदनाम हो गए, यह कहां तक सही है।
अमित गुप्ता, अमर उजाला गोरखपुर।

सुना है उसके लबों से गुलाब जलते हैं

सुना है लोग उसे आंख भर के देखते हैं
उस के शहर में कुछ दिन ठहर के देखते हैं
सुना है रब्‍त है उस को खराब हालों से
सो अपने आप को बर्बाद करके देखते हैं
सुना है दर्द की गाहक है चश्‍मे नाज़ुक उसकी
सो हम भी उसकी गली से गुज़र के देखते हैं
सुना है उस को भी है शेरो शायरी से शगफ
सो हम भी मोजज़े अपने हुनर के देखते है
सुना है बोले तो बातों से फूल झड़ते हैं
ये बात है तो चलो बात करके देखते हैं
सुना है रात उसे चांद तकता रहता है
सितारे बामे फलक से उतर के देखते हैं
सुना है हश्र हैं उसकी ग़ज़ाल सी आंखें
सुना है उसको हिरन दश्‍त भर के देखते हैं
सुना है दिन को उसे तितलियां सताती हैं
सुना है रात को जुगनू ठहर के देखते हैं
सुना है रात से बढ़ कर है काकुलें उसकी
सुना है शाम को साए गुज़र के देखते हैं
सुना है उसकी सियह चश्‍मगी क़यामत है
सो उसको सुर्माफ़रोश आंख भर के देखते हैं
सुना है उसके लबों से गुलाब जलते हैं
सो हम बहार पर इल्‍ज़ाम धर के देखते हैं
सुना है आईना तमसाल है
जबीं उसका जो सादा दिल हैं...
बन संवर के देखते हैं
सुना है जब से हमाइल हैं उसकी गर्दन में
मिज़ाज और ही लाल-ओ-गौहर के देखते हैं
सुना है चश्‍मे तसव्‍वुर से दश्‍ते इमकां में
पलंग ज़ावे उस की कमर के देखते हैं
सुना है उसके बदन के तराश ऐसे हैं
कि फूल अपनी क़बाएं कतर के देखते हैं
वो सर्व-क़द है मगर बे-गुले मुराद नहीं
कि उस शजर पे शगूफ़े समर के देखते हैं
बस एक निगाह से लुटता है क़ा‍फ़‍ला दिल का
सो रह-रवाने तमन्‍ना भी डर के देखते हैं
सुना है उसके शबिस्‍तां से मुत्तसिल है
बहिश्‍तम कीं उधर के भी जलवे इधर के देखते हैं
रुके तो गर्दिशें उसका तवाफ़ करती हैं
चले तो उसको ज़माने ठहर के देखते हैं
किसे नसीब कि बे-पैरहन उसे देखे
कभी कभी दरो दीवार घर के देखते हैं
कहानियां ही सही सब मुबालग़े ही सही
अगर वो ख़्वाब है ताबीर करके देखते हैं
अब उसके शहर में ठहरें कि कूच कर जाएं
फ़राज़ आओ सितारे सफ़र के देखते हैं---faraaz

सर्दी की खूबसूरती


सर्दियों में बला की खूबसूरत नजर आने लगती हैं
महिलाएं भले ही खुद को आकर्षक बनाने के लिए तरह-तरह के तरीके अपनाती हों लेकिन सच यह है कि पुरषों को महिलाएं सर्दियों में ही ज्यादा आकर्षित लगती हैं । पोलैंड की वरॉकलो यूनिवर्सिटी की टीम ने एक शोध में पाया है कि सर्दियों में महिलाओं की देह पुरषों को अपनी तरफ ज्यादा आकर्षित करता है और उन्हें मिलन के लिए उत्तेजित करती है । मिलन के लिए पुरुषों को प्रेरित करती हैं ‘द संडे टैलीग्राफ’ में छपी रिपोर्ट के मुताबिक शोधकर्ताओं ने बताया कि है यूं तो मौसम के अनुसार स्त्री की सुंदरता और आकर्षण में बदलाव के बारे में साफ तौर पर कुछ भी नहीं कहा जा सकता है लेकिन एक बात तो साफ है कि सर्दियों में महिलाएं ज्यादा आकर्षक लगती हैं । शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में ११४ पुरुषों को शामिल किया गया । इन्हें अलग -अलग मौसम में महिलाओं की तस्वीरें दिखा कर उनकी राय जानी गई । इन तस्वीरों में काले रंग के स्विम सूट पहने, अलग -अलग आकार के वक्षों वाली महिलाएं और जवान औरतों के चेहरों वाली तस्वीरें शामिल थीं । पुरुषों की राय जानने के बाद सामने आए नतीजे में पाया गया कि गर्मियों के बजाय सर्दियों में महिलाओं का शरीर व छाती ज्यादा आकर्षक लगती है और उन्हें मिलन के लिए प्रेरित करती है । हालाकिं चेहरे के मामले में मौसम का कोई प्रभाव नहीं देखा गया।

सदन में उछली मर्यादा ...


हमन है इश्क

हमन है इश्क मस्ताना, हमन को होशियारी क्या ?
रहें आजाद या जग से, हमन दुनिया से यारी क्या ?
जो बिछुड़े हैं पियारे से, भटकते दर-ब-दर फिरते,

हमारा यार है हम में हमन को इंतजारी क्या ?
खलक सब नाम अपने को, बहुत कर सिर पटकता है,

हमन गुरनाम साँचा है, हमन दुनिया से यारी क्या ?
न पल बिछुड़े पिया हमसे न हम बिछड़े पियारे से,

उन्हीं से नेह लागी है, हमन को बेकरारी क्या ?
कबीरा इश्क का माता, दुई को दूर कर दिल से,

जो चलना राह नाज़ुक है, हमन सिर बोझ भारी क्या ?

इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए

कैसे आकाश में सूराख़ हो नहीं सकता
एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो
अब किसी को भी नज़र आती नहीं कोई दरार
घर की हर दीवार पर चिपके हैं इतने इश्तहार
रौशन हुए चराग़ तो आँखें नहीं रहीं
अंधों को रौशनी का गुमाँ और भी ख़राब
मेले में भटके होते तो कोई घर पहुँचा जाता
हम घर में भटके हैं कैसे ठौर—ठिकाने आएँगे
हो गई है पीर —पर्वत सी पिघलनी चाहिए
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए
पत्तों से चाहते हो बजें साज़ की तरह
पेड़ों से पहले आप उदासी तो लीजिए
यहाँ दरख़्तों के
साये में धूप लगती है
चलो यहाँ से चलें और उम्र भर के लिए
जियें तो अपने बग़ीचे में गुलमोहर के तले
मरें तो ग़ैर की गलियों में गुलमोहर के लिए
यहाँ तक आते—आते सूख जाती हैं कई नदियाँ
मुझे मालूम है पानी कहाँ ठहरा हुआ होगा
मौत ने तो धर दबोचा एक चीते की तरह
ज़िन्दगी ने जब छुआ कुछ फ़ासला रख कर छुआ
मत कहो आकाश में कुहरा घना है
यह किसी की व्यक्तिगत आलोचना है
मैं भी तो अपनी बात लिखूँ अपने हाथ से
मेरे सफ़े पे छोड़ दे थोड़ा—सा हाशिया

जारी है पत्रकारिता

शराब के संग डेक पर

कबाब के संग मेज पर

शबाब के संग सेज पर

जारी है, इस दौर में पत्रकारिता

गन माईक के दम से

कलम के अहम् से

लक्ष्मी की चाहत में

जारी है, जीवन बिगारने बनानेकी पत्रकारिता

अनैतिक राहो से

अमानविये निगाहों से

अश्रधय भावों से

जारी है, लुटने खसोटने की पत्रकारिता

टी आर पी की चाह में

विजुअल की चोरी से

मनगढ़ंत स्टोरी से

जारी है, कलमुही पत्रकारिता

भुत प्रेत पिचास से

काम और अपराध के बेहूदी बकवास से

जारी है, राक्षसी पत्रकारिता

मानिए न मानिए आज के इस दौर में हो गई है

बदचलन औ बेहया पत्रकारिता .............

प्रिंसिपल ऋचा बावा के घर से 36 लाख रुपए नकद मिले (सोमवार, 7 जनवरी )

मोबाइल से निकले उद्योगपतियों, नेताओं और छात्राओं के नंबर
प्रिंसीपल ऋचा बावा के घर में सर्च कर रही पुलिस को करीब 36 लाख रुपए मिले हैं । इतनी मोटी रकम देखकर जांच दल भी हैरान है । एसएसपी अर्पित शुक्ला, एसपी (डी) परमवीर सिंह परमार और एसपी सिटी वन सुरिंदर कुमार कालिया के नेतृत्व में पुलिस दल सुबह से ही प्रिंसीपल के घर में कातिलों का सुराग लगाने के लिए सर्च कर रहा था । इस दौरान प्रिंसीपल के बैडरूम से दो सूटकेस मिले हैं । पुलिस ने प्रिंसीपल के घर से करीब 36 लाख से ज्यादा रकम बरामद की है । प्रिंसीपल के घर से कुछ सीडीज मिली हैं, जिन्हें पुलिस चलाकर देख रही है। हालाकिं इतनी मोटी रकम मिलने की कोई भी अधिकारी पुष्टि नहीं कर रहा । एसएसपी अर्पित शुक्ला का कहना है कि वे मंगलवार को घर से मिले सामान बारे जानकारी देंगे ।

कहां से आई इतनी मोटी रकम
प्रिंसीपल के घर से इतनी मोटी रकम मिलने के बाद अब यह सवाल पैदा हो गया है कि आखिरकार यह रकम कहां से आई थी । पुलिस प्रिंसीपल के परिजनों को भी तलब करेगी । पुलिस यह भी जांच करेगी कि इतनी मोटी रकम उन्होंने कैसे और किस माध्यम से कमाई थी ।
घर से मिले और सुराग
पुलिस ने सोमवार को प्रिंसीपल के घर की सर्च की । देर शाम तक एसपी रैंक के अधिकारी प्रिंसीपल के घर में रखे दस्तावेज खंगाल रही थी । इस दौरान पुलिस को तीसरा खून से सना दस्ताना मिला है । पुलिस के हाथ कुछ सुराग लगे हैं, जिससे कातिल की गर्दन तक पंहुचना आसान होगा । जबकि रसोई में काटे गए करेले और ब्रैड मिली है ।

पुलिस खंगालेगी बैंक खाते
प्रिंसीपल के घर से इतनी मोटी रकम मिलने के बाद जांच टीम अब प्रिंसीपल ऋचा बावा के बैंक खाते भी खंगाले । पुलिस प्रिंसीपल के परिजनों से यह भी जानकारी जुटा रही है उनके कहां-कहां खाते और लॉकर हैं । जाँच में जुटी पुलिस ने मोबाइल लिस्ट को खंगालना शुरू कर दिया है । लिस्ट लंबी है, इसमें लैक्चरर्स, छात्राओं, उद्योगपतियों और राजनीति में अच्छी पैठ रखने वाले लोगों के नंबर हैं । मामला शहर के रसूखदार लोगों से जुड़ा होने के कारण पुलिस अधिकारी चुप्पी साधे हैं । पुलिस ने लिस्ट में मिले नंबर पर फोन किए तो पहला फोन छात्रा ने उठाया। पुलिस जांच करेगी कि वह कौन-सी छात्राएं हैं, जो मैडम के करीब थीं और उनके निजी मोबाइल पर फोन करती थीं । गोरतलब है कि प्रिंसीपल के सख्त रवैये से छात्राएं थरथर कांपती थीं। यह सवाल पैदा होता है कि प्रिंसीपल से छात्राएं कौन-सी ऐसी बात करती थीं, जो दफ्तर या घर में नहीं हो सकती थी। कुछ कालें रात में आती थीं। पुलिस मामले में जमीन विवाद को भी जोड़ कर देख रही है। पुलिस ने सोमवार को कुछ लोग पूछताछ के लिए हिरासत में लिए हैं, जो कालेज से जुड़े हैं।लंबी बात करता था उद्योगपति प्रिंसीपल के मोबाइल लिस्ट में कुछ ऐसे नंबर भी हैं, जिन पर दिन-रात लंबी बातचीत होती थी। इसमें एक उद्योग पति का भी नंबर निकला है । उद्योगपति प्रिंसीपल से करीब पौना-पौना घंटा फोन पर बात करता था। पुलिस ने मंगलवार को पूछताछ के लिए कुछ लोग तलब किए हैं ।

रात को आती थी लग्जरी गाड़ी
केऍमवी के बाहर कई बार रात के समय लग्जरी गाड़ी खड़ी रहती थी । इस बात का खुलासा एक व्यक्ति ने नाम न बताने की शर्त पर किया है। पुलिस जांच में ऋचा बावा के फैमली फ्रैंड्स और करीबी लोगों को तलब करेगी ।
अतिंम बार प्रिंसीपल बावा ने जिस शक्स से बात की थी वह पंजाब राज्य बिजली बोर्ड का पूर्व उच्च अधिकारी है । वह अक्सर रात लग्जरी कार में कालेज आया करता था । पुलिस ने उसे भी पूछताछ के लिए मंगलवार को बुलाया है ।
रसोइए किशोर के कमरे से दो मोबाइल मिले हैं । एक उसका है जबकि दूसरा कालेज में पढ़ती छात्रा का है । अपने मोबाइल से किशोर ने कई बार अपनी पत्नी से बात की थी । कालेज के सूत्र बताते हैं कि प्रिंसीपल ने छात्रा का मोबाइल उस समय कब्जे में ले लिया था जब वह दोआबा कालेज के अपने प्रेमी से फोन से बात कर रही थी । अब यह पहेली बनी हुई कि छात्रा को मोबाइल किशोर के पास कैसे आ गया ।
शेष अभी बाकी है .......
महाबीर सेठ - जालंधर

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