अमीर बनाम गरीब भारत
ऐसे ही कारणों से क्रांतियां होती हैं। जो लोग उस घर में रह रहे हैं उनको अपने आसपास देखना चाहिए और देखना चाहिए कि क्या वह कुछ अलग कर सकता है। यदि वह ऐसा नहीं कर सकता है तो यह काफी दुखद है क्योंकि भारत को ऐसे लोगों की जरूरत है जो अपनी संपत्ति का कुछ हिस्सा लोगों की कठिनाइयां दूर करने के लिए दे सकें।'ब्रिटेन की स्टील कंपनी कोरस और कार निर्माता कंपनी जगुआर लैंड रोवर (जेएलआर) को खरीदने वाले रतन टाटा ने कहा कि भारत में अमीर और गरीब के बीच बढ़ती खाई से वह बहुत चिंतित हैं।
उन्होंने कहा कि हम इस आर्थिक असमानता को कम करने के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं। अमीर शायद चाहते ही यही हैं कि गरीबी बनी रहे। हालांकि टाटा समूह ने अपने चेयरमैन के बयान का गलत अर्थ निकालने की बात कहकर अपना बचाव किया है।
भारत का एक बार से विभाजन हो रहा है, अमीर लोगों का भारत अलग बन रहा है। और गरीब भारत अलग। किसी के पास सिर छुपाने के लिए जगह नहीं है, तो अम्बानी जैसे लोग एक अरब डालर के बंगले में रहते हैं। एक डालर में पचास रुपये होता है। हमारी गणित थोड़ी कमजोर है। हम हिसाब में समय ख़राब नहीं करना चाहते हैं।
अम्बानी और टाटा दोनों माहिर हैं, अकूत संपत्ति के मालिक हैं। इन्हें देश के विभाजन को बचाने के बारे में सोचना होगा।
पाक में छिपे भारत के 50 मोस्ट वॉन्टेड
हाफिज सईद का नाम इस सूची में सबसे ऊपर है। वह मुंबई हमलों सहित भारत में हुए अन्य आतंकी हमलों में शामिल रहा है।
इस सूची में जैश - ए - मोहम्मद के प्रमुख मौलाना मसूद अजहर का भी नाम है , जो 2001 में संसद पर हुए हमले का प्रमुख आरोपी है। सरकार ने 1999 में कंधार विमान अपहरण की घटना में बंधकों की रिहाई के बदले में अजहर को रिहा कर दिया था।
आइए आपको बताते हैं कौन-कौन हैं पाकिस्तान में छिपे वे 50 खूंखार आतंकी जिनको भारत को सरगर्मी से तलाश है।
हाफिज मोहम्मद सईद, साजिद मजीद, सैयह हाशिम अब्दुल रेहमान पाशा, मेजर इकबाल, इलियास कश्मीरी, राशिद अब्दुल्लाह, मेजर समीर अली, दाऊद इब्राहिम, मेमन इब्राहिम, छोटा शकील, मेनन अब्दुल रज्जाक, अनीस इब्राहिम, अनवर अहमद हाजी जमाल, मोहम्मद दोसा, जावेद चिकना, सलीम अब्दुल गाजी, रियाज खत्री, मुनफ हलारी, मोहम्मद सली मुजाहिद, खान बशीर अहमद, याकूब येड़ा खान, मोहम्मद मेनन, इरफान चौगुले, फिरोज राशिद खान, अली मूसा, सगीर अली शेख, आफताब बटकी
मौलाना मोहम्मद मसूद अजहर, सलाऊद्दीन, अजम चीमा, सय्यद जैबुद्दीन जाबी, इब्राहिम अतहर, अजहर यूसुफ, जहूर इब्राहिम मिस्त्री, अख्तर सईद, मोहम्मद शाकिर, रऊफ अब्दुल, अमानुल्लाह खान, सूफियां मुफ्ती, नचान अकमल, पठान याकूब खान, काम बशीर, लखबीर सिंह रोडे, परमजीत सिंह पम्मा, रंजीत सिंह, वाधवा सिंह, अबू हमजा, जकी उर रहमान लखवी, आमिर रजा खान
साभार - नभाटा
किसने क्या किया
| हाफिज सईद | लश्कर-ए-तैयबा का बिग बॉस। भारत पर 26/11 हमले का मुख्य आरोपी। |
| इलियास कश्मीरी | अलकायदा की 313 ब्रिगेड का चीफ है। ओसामा की जगह अलकायदा का चीफ बन सकता है। 26/11 का प्लान उसी ने तैयार किया था। हेडली से भी उसका नाम जुड़ा। वह भारत पर दो और हमले की तैयारी कर रहा था। |
| सैयद सलाउद्दीन | हिजबुल मुजाहिद्दीन का सुप्रीम कमांडर। कश्मीर को लेकर भारत के खिलाफ जिहाद चलाता है। |
| दाऊद इब्राहिम | अंडरवर्ल्ड डॉन। मुंबई बम धमाकों में आरोपी। आईएसआई की सुरक्षा में कराची में रह रहा है। |
| मौलाना मसूद अजहर | जैश-ए-मोहम्मद का चीफ। 2001 में संसद पर हुए हमले ( 26/11 ) का प्रमुख आरोपी। सरकार ने 1999 में कंधार विमान अपहरण की घटना में बंधकों की रिहाई के बदले में अजहर को रिहा कर दिया था। |
| मेनन इब्राहिम | दाऊद इब्राहिम का बेहद करीबी। 1993 में मुंबई में हुए सीरियल ब्लास्ट में आरोपी। |
| अनीस इब्राहिम | दाऊद इब्राहिम का भाई। डी गैंग का खास मेंबर। खाड़ी के देशों में बिजनेस चलाता है। मुंबई बम धमाकों में आरोपी। |
| छोटा शकील | दाऊद का दायां हाथ। मुंबई हमलों में आरोपी। डी कंपनी की भारत में की गई कई संगीन वारदातों में वॉन्टेड। |
| मेनन अब्दुल रजाक | टाइगर मेनन के नाम से भी जाना जाता है। 1993 को मुंबई ब्लास्ट में आरडीएक्स का इंतजाम उसी ने किया था। |
| अबू हमजा | बेंगलुरु में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस पर हुए हमले में पहली बार नाम सामने आया। इसके बाद वह पाकिस्तान भाग गया। 26/11 हमले की साजिश रचने में भी वह शामिल था। |
| अब्दुल रहमान पाशा | पाशा पहले पाकिस्तानी सेना में था। इसके बाद वह लश्कर से जुड़ गया। हेडली मामले में वह मुख्य कॉर्डिनेटर के तौर पर जुड़ा था। हालांकि पाकिस्तान इस बात से इनकार करता है। |
| जकी-उर-रहमान लखवी | लश्कर का नंबर दो कमांडर। लखवी चाचा के तौर पर भी जाना जाता है। लखवी ने 26/11 हमले के लिए ट्रेनिंग और भर्ती का काम देखा था। |
कुछ हमसे सीखो ....

121 करोड़ भारतीयों का भरोसा अब सच्चाई में बदलता नजर आ रहा है कि 21 वीं सदी भारत की होगी। दुनिया में आर्थिक महाशक्तिके रूप में उभर रहा हमारा देश ज्ञान-विज्ञान, टेक्नॉलॉजी में तो आगे है ही, अंतरराष्ट्रीय खेलों में भी शीर्ष पर चमक रहा है। यह विश्व विजय इस दिशा में सबसे प्रभावी और प्रेरक कदम है।
क्रिकेट और खेल से आगे का जहां काफी बड़ा है। टीम इंडिया ने कुछ ऐसे उदाहरण भी पेश किए, जो सिर्फ विश्व कप की कामयाबी तक सीमित नहीं हंै। इन्हें जिंदगी की सारी बाधाओं को जीतने में भी आजमाया जा सकता है, बशर्ते वैसा अनुशासन भी हो। यूं तो इस खेल के कई सबक हैं, लेकिन छह बेशकीमती बातें ये रहीं-
सर्वश्रेष्ठ पर निर्भर न रहो : डोंट डिपेंड ऑन द बेस्ट..
जो सर्वश्रेष्ठ ही हैं, सिर्फ उनके सहारे बात नहीं बनेगी। सबको अपना सर्वश्रेष्ठ देना होगा। शांति और धर्य के साथ। टीम में बेहतरीन कामयाबी का सीधा सूत्र है —डोंट डिपेंड ऑन द बेस्ट..जैसे : फाइनल में सचिन और सहवाग के जल्दी आउट होने के बाद गंभीर और कोहली जैसे युवा खिलाड़ियों ने टीम को संभालने की जिम्मेदारी बखूबी निभाई।
बढ़ो और बदल डालो.. गो एंड टर्नअराउंड..
मकसद हासिल करने का इसके सिवाए कोई दूसरा रास्ता नहीं। अपने कदमों पर पूरा-पक्का भरोसा और कुछ बेहतर कर दिखाने की जिद। आगे बढ़ा हुआ हर कदम अगले एक और कदम की प्रेरणा बनेगा। इसलिए मत भूलिए —गो एंड टर्नअराउंड..
जैसे : पूरे टूर्नामेंट में बहुत सफल न रहने के बाद भी महेंद्र सिंह धोनी ने नाजुक मौके पर महत्वपूर्ण पारी खेलकर खुद को साबित कर दिखाया।
कभी ना न कहो..
नकारात्मक होने से बात बिल्कुल नहीं बनेगी। उसे हर हाल में नकारना ही होगा। ताकि ऊर्जा का हर हिस्सा एक ही दिशा में लग सके। सिर्फ एक ही सूत्र चित्त का चरित्र बदल देगा -
—नेवर से नो..
जैसे खराब फार्म से जूझ रहे युवराज सिंह वल्र्ड कप से पहले क्रिकेट से संन्यास लेने की सोच रहे थे पर उन्होंने नकारात्मक सोच पर विजय पाई और हीरो बनकर उभरे।
खतरे भरे कदम उठाओ
बिना खतरे के कभी बड़े मकसद मिलते भी नहीं। लंबी दूरी नापने के लिए भरी-पूरी छलांग जरूरी है। खतरे उठाने की तैयारी जितनी होगी, मंजिल से दूरी उतनी ही कम होगी। सीधी बात है
—मेक डैंजरस मूव्स..
जैसे फाइनल मैच में आर. अश्विन की जगह श्रीसंत और पठान की जगह रैना को मौका देने और खुद को युवराज से पहले बैटिंग करने के धोनी के फैसले खतरों से भरे जरूर थे, लेकिन उन्हीं से नतीजा हासिल हुआ।
हर पल रणनीति बनाओ
बिना सोचे-विचारे आगे बढ़े कदम अंधेरी दिशा में ही होंगे। मतलब रणनीति की रोशनी जरूरी है। हर कदम पर। हालात जब और जैसे भी मोड़ लें, रणनीति भी फौरन बदलें।
—स्ट्रेटजी फॉर एवरी एक्ट..
जैसे स्पिन खेलने में कमजोर वेस्ट इंडीज टीम के खिलाफ बॉलिंग की शुरुआत आर. अश्विन से कराकर धोनी ने सभी को चौंका दिया। और जब हर मैच में मध्य क्रम लड़खड़ा रहा था तो उन्होंने पठान की जगह रैना को उतारा।
अपना सौ फीसदी दो..
पूरे मन और प्राण से ही जुटना होगा। आधे-अधूरे मन से की गई कोशिशें नतीजे भी धुंधले ही लाएंगी। हरेक अपना सौ फीसदी सामने लाए। इसे सिद्ध सूत्र की तरह मन में उतारिए
—गिव योर हंड्रेड परसेंट..
जैसे फील्डिंग में कमजोर मानी जा रही हमारी टीम ने सेमी फाइनल और फाइनल में अपनी चुस्ती-फुर्ती से विरोधियों को एक-एक रन के लिए तरसा दिया। साथ ही कुछ नामुमकिन से कैच लिए और एकदम तय दिख रहे चौके बचाए। साभार - दैनिक भास्कर
लूट सको तो लूट लो...
नहीं रहा"* ये कहना है स्विस बैंक के डाइरेक्टर का.
स्विस बैंक के डाइरेक्टर ने यह भी कहा है कि भारत का लगभग 280 लाख करोड़
रुपये उनके स्विस बैंक में जमा है.
ये रकम इतनी है कि भारत का आने वाले 30 सालों का बजट बिना टैक्स के बनाया
जा सकता है. या यूँ कहें कि 60 करोड़ रोजगार ...के अवसर दिए जा सकते है.
या यूँ भी कह सकते है कि भारत के किसी भी गाँव से दिल्ली तक 4 लेन रोड
बनाया जा सकता है. ऐसा भी कह सकते है कि 500 से ज्यादा सामाजिक प्रोजेक्ट
पूर्ण किये जा सकते है. ये रकम इतनी ज्यादा है कि अगर हर भारतीय को 2000
रुपये हर महीने भी दिए जाये तो 60 साल तक ख़त्म ना हो. यानी भारत को किसी
वर्ल्ड बैंक से लोन लेने कि कोई जरुरत नहीं है. जरा सोचिये ... हमारे
भ्रष्ट राजनेताओं और नोकरशाहों ने कैसे देश को लूटा है और ये लूट का
सिलसिला अभी तक 2011 तक जारी है. इस सिलसिले को अब रोकना बहुत ज्यादा
जरूरी हो गया है.
अंग्रेजो ने हमारे भारत पर करीब 200 सालो तक राज करके करीब 1 लाख करोड़
रुपये लूटा. मगर आजादी के केवल 64 सालों में हमारे भ्रस्टाचार ने 280 लाख
करोड़ लूटा है. एक तरफ 200 साल में 1 लाख करोड़ है और दूसरी तरफ केवल 64
सालों में 280 लाख करोड़ है.
यानि हर साल लगभग 4.37 लाख करोड़, या हर महीने करीब 36 हजार करोड़ भारतीय
मुद्रा स्विस बैंक में इन भ्रष्ट लोगों द्वारा जमा करवाई गई है. भारत को
किसी वर्ल्ड बैंक के लोन की कोई दरकार नहीं है. सोचो की कितना पैसा हमारे
भ्रष्ट राजनेताओं और उच्च अधिकारीयों ने ब्लाक करके रखा हुआ है.
हमे भ्रस्ट राजनेताओं और भ्रष्ट अधिकारीयों के खिलाफ जाने का पूर्ण
अधिकार है.हाल ही में हुवे घोटालों का आप सभी को पता ही है - CWG घोटाला,
२ जी स्पेक्ट्रुम घोटाला , आदर्श होउसिंग घोटाला ... और ना जाने कौन कौन
से घोटाले अभी उजागर होने वाले है....
तो भाई लोग ... लूट सको तो लूट लो.....
किसी गरीब लड़की की नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की अस्मत लुट रही है
फतेहपुर के बिंदकी के उरदाली गांव के मजदूर बदलू राम ने हैलट अस्पताल के आईसीयू के बाहर कहा कि हम बहुत गरीब हैं, मजदूरी करके अपना पेट पालते हैं। हमारी एक ही बेटी थी, जो बालिका इंटर कॉलेज में कक्षा 11वीं की छात्रा है। वह पढ़ाई में बहुत तेज थी, इसलिये हमने अपना पेट काटकर उसे साइकिल भी दिला दी थी और वह साइकिल से ही स्कूल जाती थी। लेकिन, पांच फरवरी को जब वह सुबह शौच के लिए अपनी सहेली छाया के साथ खेतों पर गई, तभी वहां शिव ओम नाम के लड़के और उसके कुछ साथियों ने उसे पकड़ लिया और उसके साथ रेप की कोशिश की। बेटी ने इसका विरोध किया तो उसे कुल्हाड़ी से काट डाला।
उत्तर प्रदेश में फतेहपुर जिले के बिंदकी क्षेत्र में शनिवार देर शाम को कुछ युवकों ने रोप का विरोध करने पर एक दलित नाबालिग लड़की का कुल्हाड़ी से एक हाथ, पैर और नाक, कान काट दिये थे। उसे गंभीर हालत में कानपुर के हैलट अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है।
लड़की के सिर, हाथ और चेहरे पर करीब एक दर्जन गहरे जख्म के निशान हैं और डॉक्टरों के अनुसार, रेप के प्रयास में नाकाम होने पर बहुत बेदर्दी से किसी धारदार हथियार से उस पर वार किए गए हैं। अस्पताल के डॉक्टर उसका इलाज करने में लगे हैं और कल शाम उसका एक बड़ा ऑपरेशन किया भी गया, जिसमें ऑर्थोपेडिक, प्लास्टिक सर्जरी और मैक्सियोफेशियल सर्जरी और डेंटल सर्जरी के डाक्टरों की टीम शामिल थी।
लड़की के पिता ने बताया कि उनकी बेटी को बहला फुसला कर उसकी सहेली छाया जंगल की तरफ ले गई, जहां शिव ओम नाम का गांव का ही लड़का अपने दो या तीन साथियों के साथ मौजूद था। लड़के ने पहले तो उसके साथ रेप का प्रयास किया, लेकिन जब वह नाकाम रहा तो उसने लड़की के ही दुपटटे से उसका मुंह बांध दिया और उसे कुल्हाड़ी से बुरी तरह काट डाला। वह कहते हैं कि इसके बाद लड़की की सहेली छाया अपने घर वापस आ गई, क्योंकि वह उस शिव ओम से पहले से मिली हुई थी।
उन्होंने रोते हुए कहा कि प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती हमारा दर्द अच्छी तरह समझ सकती हैं। बहन जी हमें इंसाफ चाहिए, जिस तरह से हमारी बेटी के साथ हुआ है वह अब और किसी लड़की के साथ न हो, इसलिये जो लोग इसके दोषी हैं उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाए। हम आपसे अपनी बेटी के लिए इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं।
लड़की की मां महादेई ने हाथ जोड़ कर रोते हुये कहा, 'हमारी इकलौती बेटी है वह, बच जाए बस मैं भगवान से यही प्रार्थना कर रही हूं। हमारी एक ही बेटी थी। हम चाहते थे कि वह पढ़ लिख जाए तो उसकी शादी करें। हम तो नहीं पढ़े-लिखे हैं, लेकिन हम अपनी बेटी को पढ़ाना चाहते थे, इसलिये उसे पढ़ा रहे थे और वह भी बहुत मन लगाकर पढ़ती थी। हर साल इम्तिहान में पास भी होती थी। बेटी के इलाज के बारे में पूछने पर बदलूराम ने कहा कि अभी तक सारा इलाज मुफ्त हुआ है और उनसे कोई भी पैसा नहीं लिया गया है, उनके खाने-पीने का इंतजाम भी अस्पताल से ही करवाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि लड़की की हालत अब डॉक्टर ठीक बता रहे हैं।
विमान दुर्घटना में नेताजी की मौत को नकारते आठ सबूत
नेताजी सुभाषचन्द्र बोस की मृत्यु के सम्बन्ध में कोई कहता है कि 18 अगस्त 1945 को नेताजी विमान दुर्घटना में मर गये, कुछ लोगों का कहना है कि वो छिपे हुये हैं। वस्तुतः स्थिति क्या है, इस सम्बन्ध में दृढ़तापूर्वक कोई नहीं कह सकता, लेकिन नीचे दिये गये तथ्यों के आधार पर यह अवस्य कहा जा सकता है कि 18 अगस्त 1945 को विमान दुर्घटना में नेता जी की मृत्यु नहीं हुई।
1. आजाद हिन्द फौज के सर्वोच्च अधिकारी नेताजी सुभाष चन्द्र बोस सन् 1999 तक राष्ट्र सघ के यु़द्ध अपराधी क्यों घोषित किये गये? यदि 1945 में मर चुके थे तो उसके बाद 1999 तक युद्ध अपराधी मानना अपने आप में षक पैदा करता है।
2. सन् 1947 के आजादी के समझोते के गुप्त दस्तावेज तथा फाईल आई एन ए नं. 10 पेज नं. 279 को अध्ययन करने से पता चलता है कि 18 अगस्त 1945 को विमान दुर्घटना में नेता जी की मृत्यु नहीं हुई।
3. नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की कथित मृत्यु की घोषणा के उपरान्त नेहरु जी ने सन् 1956 में शाहनवाज कमेटी तथा इन्दिरा गांधी ने 1970 में खोसला आयोग द्वारा जांच करवाई तथा दोनों रिर्पोटों में नेताजी को मृत घोषित किया गया, लेकिन 1978 में मोरारजी देसाई ने इन रिर्पोटों को रद्द कर दिया। तथा राजग सरकार ने भी मुखर्जी आयोग की स्थापना कर पुनः इस प्रष्न का उत्तर तलाषने का प्रयास किया था। लेकिन मुखर्जी आयोग द्वारा जांच रिपोर्ट को वर्तमान कांग्रेस सरकार ने मानने से ही इंकार कर दिया। इस जांच रिपोर्ट में जापान सरकार द्वारा जापान में 18 अगस्त 1945 को कोई दुर्घटना होने की बात को सिरे से खारिज करना इस सन्देह को सच्चाई में बदलता है कि नेताजी की मृत्यु 18 अगस्त 1945 को नहीं हुई।
4. सन् 1948 में विजय लक्ष्मी राजदूत ने रुस से वापिस आकर मुम्बई शा न्ताक्रुज़ हवाई अड्ड़े से उतरते ही पत्रकारों के सामने कहा कि मैं भारत की जनता को ऐसा शुभ समाचार देना चाहती हूँ जो भारत की स्वतन्त्रता से बढ़कर ख़ुशी का समाचार होगा परन्तु नेहरु जी ने इस समाचार को जनता तथा पत्रकारों को देने से इन्कार कर दिया क्योंकि वह समाचार नेताजी से रुस में मुलाकात होने का संदेष था।
5. भारतीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 4 अगस्त 1997 को दिये गये निर्णय के अनुसार 'नेताजी के नाम के साथ मरणोपरान्त षब्द रद्द किया जाता है।' क्या यह सिद्ध नहीं होता कि नेताजी की मृत्यु नहीं हुई ।
6. सेना मुख्याल्य द्वारा आयोजित 1971 की लड़ाई का विजय दिवस का सीधा प्रसारण 16 दिसम्बर 1997 को दिल्ली दूरदर्षन पर सांय 5-47 बजे से लेकर 7-00 बजे तक किया गया जिसमें बताया गया कि 8 दिसम्बर 1971 को भारतीय सेना और मुक्ति वाहिनी सेना की कमान एक बाबा संभाले हुये थे। दो दो सेनाओं की कमान सम्भालने वाला आखिर यह बाबा कौन था। सरकार इस बाबा का रहस्योदघाटन करे।
7. 28 मई 1964 को प्रधानमन्त्री जवाहर लाल नेहरु की मृत्यु पर बनी सरकारी डाक्यूमैन्टरी फिल्म के लास्ट चैप्टर की फिल्म नं. 816 बी जिसमें साधु के वेष में नेता जी दिखाई दे रहे हैं।
8. नेताजी की तथाकथित मृत्यु 18.08.1945 के बाद मंचुरिया रेड़ियो स्टेशन से 19.12.1945, 19.01.1946, 19.02.1946 को नेता जी द्वारा राष्ट्र के नाम दिये गये सन्देश क्या यह साबित नहीं करते हैं कि नेताजी की मृत्यु का समाचार गलत है।
उपरोक्त तथ्यों को देखते हुये तो हम यह ही कह सकते हैं कि नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जो कि रहस्यमयी तरीके से रहे, रहस्यमयी तरीके से अंग्रेजों की जेल से निकले, रहस्यमयी तरीके से लड़ाई लड़ी, और रहस्यमयी तरीके से ही अदृष्य होकर आज भी रहस्य बने हुये हैं।
दिख सकता है एक और सूरज, रातें भी बनेंगी दिन

साल 2012 तक ऐसा कुछ हो सकता है जिसकी कल्पना शायद आपने न की हो। हो सकता है, किसी दिन अचानक आपको दिन ज्यादा रोशन लगने लगे, रात को चांद के साथ सूरज भी चमकता दिखे, और तो और रोज सुबह सूरज देखकर दिन शुरू करने वाले या उसे जल चढ़ाने वाले भी आसमान में दो सूरज देखकर कनफ्यूज हो जाएं। ऐसा हो सकता है, अगर अब तक की सबसे बड़ी सनसनी, वैज्ञानिकों की यह भविष्यवाणी सही साबित हो गई।
ब्रिटिश अखबार डेली मेल के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया की सदर्न क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी में फिजिक्स के सीनियर लेक्चरर ब्रैड कार्टर ने दावा किया है कि यूनिवर्स के सबसे चमकदार तारों में से एक बीटलगेस तारा अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है। यह जल्दी ही एक बड़े विस्फोट के बाद सुपरनोवा में तब्दील होकर खत्म हो जाएगा। इससे धरती पर रोशनी की बारिश होगी और इस शानदार लाइट वर्क से धरती पर रातें भी सूरज की रोशनी से नहाई होंगी। यह नजारा एक दिन नहीं, दो दिन नहीं, बल्कि पूरे दो हफ्ते तक रह सकता है।
नेताजी सुभाष चंद बोस को नमन

भारत की आजादी की लड़ाई के सबसे महान नायकों में से एक नेताजी सुभाष चंद बोस का जन्म 1897 में आज ही के दिन हुआ था। जहां एक तरफ कांग्रेस टुकड़ों में आजादी पाने की बात करती थी, वहीं नेता जी जल्दी से जल्दी पूर्ण स्वतंत्रता के पक्षधर थे। उन्हें लगता था कि गांधी जी के अहिंसा सिद्धांत से आजादी नहीं मिल सकती।
दूसरे विश्व युद्ध में उन्होंने ब्रिटेन और दूसरी पश्चिमी ताकतों के खिलाफ इंडियन नैशनल आर्मी का नेतृत्व किया। वह दो बार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष रहे, लेकिन गांधी जी से मतभेद के चलते उन्होंने अपना पद छोड़ दिया। माना जाता है कि 1945 में उनका देहांत हो गया।
- तुम मुझे मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा। - अगर दुनिया में सबसे बड़ा कोई अपराध है तो वह है अन्याय और गलत चीजों के साथ समझौता करना। - सच्चा सिपाही वह है जिसे मिलिट्री के साथ-साथ स्प्रिचुअल ट्रेनिंग भी दी गई हो। - हो सकता है कि किसी विचार की खातिर किसी की जान चली जाए, लेकिन उसकी मौत के बाद उसका वही विचार हजारों दूसरे लोगों के दिलों में पैदा होगा। विचार और सपने एक जगह से दूसरी जगह और एक देश से दूसरे देश इसी तरह फैलते हैं।
- आजादी दी नहीं जाती, आजादी छीनी जाती है। - इतिहास गवाह है, दुनिया में कोई बड़ा बदलाव सिर्फ बातचीत से कभी नहीं आया। - आज हमारी एक इच्छा जरूर होनी चाहिए। इच्छा मरने की, ताकि भारत जी सके। हमारे अंदर ताकत होनी चाहिए एक शहीद की मौत का सामना करने की, ताकि उसके खून से आजादी की कहानी लिखी जा सके।
गल रोटियां दी जदों चलाइए, खाण नूं बारूद मिलदा

बंतसिंह एक ऐसा नाम, जिसके कंठ से गीत फूटते ही सुनने वाले के तन मन में सिहरन सी दौड़ जाती है। कुहनियों से काट दिए गए हाथों और घुटनों से नीचे तोड़ दिए गए पांवों वाला एक कद्दावर इंसान। गंभीर चेहरा और दमदार आवाज। अत्याचारियों को नेस्तनाबूद कर देने का आह्वान। बंतसिंह कहते हैं कि दुश्मनों ने हाथ-पांव ही तो काटे हैं, मेरा हौसला थोड़े ही खत्म किया है। मेरी जुल्म से लडऩे की ताकत तो दुबारा से अंकुरित होकर लहलहा रही है।
बंतसिंह जहां भी जाते हैं, ऊंची आवाज में हेक लगाते हैं -असीं जड़ ना जुल्म दी छड्डणी, साडी भावेंं जड़ ना रहे। लोक वे मरजाण ओ चंदिरियां मांवां जिनां ने समराज जम्मेआ। गल रोटियां दी जदों चलाइए, खाण नूं बारूद मिलदा। यानी हम जुल्म की जड़ को मिटाकर ही दम लेंगे। भले ही हमारी अपनी जड़ क्यों न मिट जाए। वे मांएं इस धरती पर क्या कर रही हैं, जिन्होंने अत्याचारियों को जन्म दिया है। हम जब भी कुछ खाने को मांगते हैं, वे हमारी थाली में रोटी देने के बजाय बारूद परोस देते हैं।
पंजाब के मानसा जिले के गांव चब्बर में मनिहार का काम करने वाले बंतसिंह गांव-गांव में घूमते और जातिवाद के खिलाफ आवाज उठाते। निर्धन, पीडि़त और दलितों में आत्मसम्मान का भाव जगाते।
अन्नदाता कर रहे हैं आत्महत्या

राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के आकंडों के अनुसार भारत भर में 2009 के दौरान 17368 किसानों ने आत्महत्या की है।किसानों के हालात बुरे हुए हैं, इस बात का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि किसानों की आत्महत्या की ये घटनाएँ, 2008 के मुकाबले 1172 ज़्यादा है। इससे पहले 2008 में 16196 किसानों ने आत्महत्या की थी।जिन राज्यों में किसानों की स्थिति सबसे ज़्यादा खराब है उनमें महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सबसे आगे हैं.किसानों की आत्महत्या की कुल घटनाओं में से 10765 यानी 62 प्रतिशत आत्महत्याएँ इन पाँच राज्यों में ही हुई है.
तमिलनाडु में हालात बदतर
इन पाँच राज्यों के अलावा सबसे बुरी ख़बर तमिलनाडु से है. वर्ष 2009 में यहाँ दोगुने किसानों ने आत्महत्या की. वर्ष 2008 में यहाँ 512 किसानों ने आत्महत्याएँ कीं जो वर्ष 2009 में 1060 पर जा पहुँची. पिछले दस वर्षों से किसान आत्महत्याओं के आंकड़ो में अव्वल रहने के लिए बदनाम महाराष्ट्र 2009 में भी सबसे आगे रहा, हालांकि यहाँ आत्महत्या की घटनाओं में कमी आई है. महाराष्ट्र में 2009 के दौरान 2872 किसानों ने आत्महत्या की जो कि 2008 के मुकाबले 930 कम है. इसके बाद कर्नाटक में सबसे ज़्यादा 2282 किसानों ने आत्महत्याएँ की. केन्द्रशासित प्रदेशों में पॉन्डिचेरी में सबसे ज्यादा 154 किसानों ने आत्महत्या की. पश्चिम बंगाल में 1054, राजस्थान में 851, उत्तर प्रदेश में 656, गुजरात में 588 और हरियाणा में 230 किसानों ने आत्महत्या की.
राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के आकंडों के अनुसार 1997 से 2009 तक भारत में दो लाख 16 हज़ार 500 किसान आत्महत्या कर चुके हैं।कुल 28 राज्यों में से 18 राज्यों में किसान आत्महत्याओं की संख्या में इज़ाफा हुआ है।जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में किसान आत्महत्याओं में ना के बराबर इज़ाफ़ा हुआ है.
बनारस में ब्लास्ट...
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विस्फोट आरती स्थल से लगभग 20 मीटर दूरी पर हुआ। उस दौरान आरती देखने के लिए मौके पर हजारों लोग जमा थे। विस्फोट की चपेट में आने से आधा दर्जन वहीं लहूलुहान होकर गिर पड़े, जबकि दो दर्जन लोगों को गहरी चोट आयी। घाट समेत आसपास के इलाकों में भगदड़ मच गयी।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बम दूध के कंटेनर में रखा गया था। छह दिसंबर के अगले दिन हुए इस धमाके को पूर्व नियोजित माना जा रहा है। अयोध्या के विवादित ढांचा ध्वंस की बरसी का दिन सुकून से गुजरा था। पुलिस फोर्स थोड़ा बेफिक्र थी। इसका फायदा भी आतंकियों ने उठाया। पुलिस का अनुमान है कि बम को टाइमर सिस्टम से कंट्रोल किया गया था। इसमें आईईडी या आरडीएक्स के प्रयोग की संभावना को भी पुलिस खंगाल रही है। फिलहाल पूरे इलाके को अर्द्ध सैनिक बलों के हवाले करने के बाद सील कर दिया गया है।
सूचना मिलते ही पुलिस व प्रशासन के आला अधिकारी मौके पहुंच गये। घायलों में इटली निवासी 52 वर्षीय मनतरली व सुल्तानपुर निवासी जरायू को कबीरचौरा स्थित मंडलीय अस्पताल पहुंचाया गया। शेष घायलों को विभिन्न अस्पतालों में ले जाया गया। इनमें टेढ़ी नीम निवासी एक वर्षीय बच्ची बेबी भी शामिल थी। उसकी नानी उसे लेकर गंगा आरती देखने गयी थी। इसी दौरान विस्फोट की जद में आकर बेबी घायल हो गयी। उपचार के लिए उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया। उसकी 45 वर्षीय नानी उर्मिला भी गंभीर रूप से घायल है।
इस संबंध में सूचनाओं की जानकारी के लिए प्रशासनिक हेल्पलाइन नंबर है 05422502626, 0542100।
उधर, प्रतिबंधित आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन ने विभिन्न मीडिया प्रतिष्ठानों को ईमेल भेजकर वाराणसी बम विस्फोट की जिम्मेदारी ली। यह ईमेल मुंबई के मलाड से भेजा गया।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि पांच पृष्ठ के इस ई-मेल पर अल अरबी के हस्ताक्षर हैं जिसका इंटरनेट प्रोटोकाल पता मुंबई के उपनगरीय इलाके मलाड में निकला और पुलिस की टीमें तत्काल वहां पहुंचीं। इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी विस्फोटों के चंद मिनट के भीतर ई-मेल भेजने के लिए वाईफाई के कनेक्शनों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
गृहमंत्री ने कहा कि वाराणसी विस्फोट की जिम्मेदारी लेने के लिए इंडियन मुजाहिदीन द्वारा कथित तौर पर भेजे गए ईमेल की विश्वसनीयता की जांच की जा रही है। चिदंबरम ने कहा, वाराणसी में विस्फोट भटके हुए समूह द्वारा शांति और भाईचारे को बाधित करने की कोशिश है।
यह आतंकी हमला है : एडीजी
यूपी पुलिस को वाराणसी में हुए बम धमाके के पीछे आतंकवादियों का हाथ होने का संदेह है। सबसे ज्यादा शक इंडियन मुजाहिदीन पर है। अपर पुलिस महानिदेशक [कानून-व्यवस्था] बृजलाल ने मीडिया को बताया कि घटना में आतंकी हाथ होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रथम दृष्टया शक की सुई इंडियन मुजाहिदीन पर जा रही है।
उन्होंने बताया कि घटना के मद्देनजर पूरे प्रदेश में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। जिलों की पुलिस को सावधान किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि फिलहाल घटना में किसी के मरने की खबर नहीं है। सात लोगों के घायल होने की बात सामने आई है। इसमें एक विदेशी भी है। घायलों को अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है।
दूसरी ओर मुख्यमंत्री मायावती ने प्रमुख सचिव गृह कुंवर फतेह बहादुर तथा डीजीपी करमवीर सिंह को तत्काल वाराणसी पहुंचने का निर्देश दिया है। शाम साढ़े सात बजे दोनों अधिकारी राजकीय विमान से वाराणसी के लिए चल पड़े। उनके साथ सहकारिता मंत्री व बसपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य भी हैं।
एडीजी ने बताया कि घटना की सूचना पाकर वाराणसी रेंज के आईजी व अन्य अधिकारी मौके पर तत्काल पहुंच गये और राहत व बचाव कार्य में लग गये। अभी तक प्राप्त प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक बम एक बैग में रखा गया था और विस्फोट टाइमर के जरिये किया गया। उन्होंने कहा कि बम में किस प्रकार के विस्फोटक का प्रयोग किया गया यह जांच के बाद ही पता चलेगा।
भिखारी हो तो ऐसा ...
पेट भरने के लिए सड़कों पर भीख मांगने वाले भिखारी तो हर कहीं देखने को मिल जाते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में एक ऐसे भिखारी हैं जो भीसोनभद्र जिले के निवासी रमाशंकर कुशवाहा (58) रामगढ़ कस्बे में स्थित शवि मंदिर के महंत हैं। पूरे इलाके में ये 'भिखारी बाबा' के नाम से मशहूर हैं। भिखारी बाबा अब तक करीब 600 गरीब आदिवासी व दलित कन्याओं का विवाह कराकर उनका घर बसवा चुके हैं।
भिखारी बाबा ने कहा, ''मुझे हर बेसहारा और गरीब कन्या में अपनी बेटी नजर आती है। मैं नहीं चाहता है कि धन के अभाव में किसी कन्या की डोली न उठ पाए। इसलिए शादी कराके उनका जीवन सुखमय बनाने के लिए मैं भीख मांगता हूं।''
लड़कियों की शादी में खर्च होने वाला धन जुटाने के लिए वह साल भर अपने शिष्यों के साथ घूम-घूम कर भीख मांगते हैं।
बाबा कहते हैं, ''हर महीने के करीब पंदह दिन मैं अपने शिष्यों के साथ सोनभद्र और आस-पास के जिलों में भीख मांगता हूं। फिर शादी के मुहूर्त वाले महीनों फरवरी से जून के बीच में कोई एक दिन निर्धारित करके लोगों की मदद से शवि मंदिर परिसर में विवाह समारोह आयोजित करता हूं।''
भिखारी बाबा भीख मांगकर पिछले 5 सालों से सोनभद्र और आस-पास के जिलों की गरीब आदिवासी और दलित लड़कियों की सामूहिक शादी कराते आ रहे हैं।
बाबा के जीवन में घटी एक मार्मिक घटना ने उन्हें इस काम को अंजाम देने के लिए प्रेरित किया। बाबा कहते हैं, ''साल 2005 में मेरे आश्रम के पास संतोष कुमार नाम का एक युवक आया और कुएं का पानी पीकर छाया में सुस्ताने लगा। तभी उसे अचानक दिल का दौरा पड़ गया और उसकी वहीं पर मौत हो गई। संतोष के घर में केवल उसकी एक छोटी बहन रीता थी। उसकी मौत की खबर पाकर वहां बदहवास हालत में वहां आई और रो-रोकर कहने लगी कि अब उसका क्या होगा..कौन उसकी देखभाल करेगा। उसे रोता बिलखता देख मैंने सबके सामने उसकी शादी कराने का ऐलान किया और उसी समय प्रण लिया कि आज से मैं बेसहारा और गरीब कन्याओं की शादी कराऊंगा।''
बाबा के मुताबिक 2005 में पहली बार रीता के साथ उन्होंने 21 गरीब कन्याओं की शादी करवाकर इस मुहिम की शुरुआत की थी। उसके बाद से लगातार यह सिलसिला जारी है। बीते साल उन्होंने 100 से अधिक कन्याओं का सामूहिक विवाह करवाया। अगले साल भिखारी बाबा का 106 लड़कियों का विवाह कराने की प्रण है।
जिस अनाथ लड़की के माता-पिता नहीं होते हैं भिखारी बाबा उसके लिए उसी की जाति का वर खोजकर शादी करवाते हैं। यहीं नहीं लड़की को मां-बांप की कमी न महसूस हो इसके लिए वह बाकायदा कन्यादान भी करते हैं।
प्रेम का बिरवा

मैं
माँ की कोख में पल रहा
प्रेम का नन्हा बिरवा था
उसके पहले मैं ज्योति-पुंज का एक अंश था
एक दिन
अंतरिक्ष में चक्कर लगाते मैंने धरती पर
प्रेम का अद्भुत प्रकाश देखा
और उसे पास से देखने के लोभ में
माँ की कोख में गिर पडा़
कोख में बहुत अन्धेरा था
पर मैं खुश था
क्योंकि मैं आदमी की तरह
ले रहा था रूपाकार...
मेरी माँ
रात-दिन गुनगुनाया करती
उसके रोम-रोम से
प्रेम के सोते फूटते रहते
पिता इन दिनों बाहर थे
माँ मेरे सहारे प्रसन्न थी
पर कभी-कभी उदास हो जाती
क्योंकि अभी तक नहीं थी
उनके प्रेम को
स्वीकृति समाज की...
पर मुझे इससे क्या फर्क पड़ता
मैं तो प्रेम का बिरवा था
माँ की कोख में पल रहा...
और उस दिन
माँ बहुत खुश थी
पूरा घर महक रहा था
माँ के तन-मन की तरह
पिता आने वाले थे...
वे आए
माँ उनके सीने से लग गई
मैंने आँखें बंद कर ली
अचानक माँ की हिचकियों से चौंका
देखा पिता अजनबी से दूर खडे़ थे
हुआ क्या है...
मैंने कान लगाकर सुनने की
कोशिश की
और जो सुनाई पडा़
उसने मुझे काठ कर दिया
पिता
मुझे अपना मानने से इन्कार कर रहे थे
वे मेरी हत्या की बात भी
कह रहे थे
मैं सदमें में था
यह वही आदमी है क्या
जिसकी आँखों में मैंने
उस दिन इतना प्यार देखा था
माँ तो बेचारी भोली स्त्री थी
मैं अंतरिक्ष का वासी
कैसे धोखा खा गया...?
जी चाहा
ऐसे आदमी की हत्या कर दूँ
जो माँ को भी माँ की तरह
कमज़ोर... मज़बूर
ओर सीमाओं में जकड़े था
पिता चले गए
और फिर माँ पर
ढाए जाने लगे जुल्म...
पूरा संसार ही जैसे हम दोनों का शत्रु बन गया था
अब मैं
पाप का बिरवा था
माँ की कोख में पल रहा...
मैं
कई-कई दिन
माँ के साथ
भूखा-प्यासा रहा
गालियाँ और मार सहता रहा
मैं... माँ को सान्त्वना
देना वाहता था
"मैं दूंगा तुम्हारा साथ...
तुम खुद को अकेली न समझो माँ...
पर माँ अपने दुख में डूबी
मेरी आवाज़ नहीं सुन पा रही थी
तभी तो हार रही थी
टूट रही थी...
मैं
इस
माँ के साथ
एक बडे़ कमरे में
बडी़-सी मेज़ पर लेटा हुँ
इस कमरे में
ढेर-सारे औजार हैं
और नाक-मुँह ढँकी नर्से...
मेरा जी घबरा रहा है
माँ के हाथ-पैरों को
ऊँचा करके बाँधा जा रहा है
जैसे जिबह के लिए बकरे को...
एक नर्स इन्जेक्शन लेकर
बढ़ रही है माँ की तरफ़
मैं डर के मारे आँखे बंद कर लेता हूँ
अचानक मेरे बदन में
जैसे सैंकड़ों सुइयाँ चुभने लगी हैं
मैं देखता हूँ
माँ बेहोश हो गई है
और नुकीले औजार मेरी ओर
बढ़ रहे हैं
मैं पूरे जोर से चीखता हूँ
माँ! मुझे बचाओ...
पर माँ निष्पंद पडी़ है...
मैं अकेला
और इतने खतरनाक शत्रु
संड़सी मुझे पकड़ने की कोशिश में है
मैं इधर-उधर दुबकने की कोशिश करता हूँ
पर कब तक...
संड़सी ने मेरे गले को पकड़ लिया है
हथौडा़ मेरे सिर को कुचल रहा है
माँ की कोख में फैली मेरी जड़ों को
बेदर्दी से काटा जा रहा है...
सोचता हूँ
जब माँ को होश आएगा
कितना रोएगी वह मेरे लिए
जब तक जीएगी... रोएगी
रोयेगी कि क्यों किया था उसने प्रेम...
मैं ठोस से तरल हो रहा हूँ
माँ... माँ मुझे क्षमा करना
मैं तुम्हारा साथ न दे सका
बहुत कमज़ोर निकला
तुम्हारी कोख में पल रहा
यह बिरवा
माँ... माँ।
- रंजना जायसवाल
तुम्हारी फाइलों में गाँव का मौसम गुलाबी है
मगर ये आंकड़े झूठे हैं ये दावा किताबी है
उधर जम्हूरियत का ढोल पीते जा रहे हैं वो
इधर परदे के पीछे बर्बरीयत है ,नवाबी है
लगी है होड़ - सी देखो अमीरी औ गरीबी में
ये गांधीवाद के ढाँचे की बुनियादी खराबी है
तुम्हारी मेज़ चांदी की तुम्हारे जाम सोने के
यहाँ जुम्मन के घर में आज भी फूटी रक़ाबी है
- अदम गोंडवी

